टीटीडी ज़मीन सौदे पर सियासी भूचाल: ओबेरॉय को ज़मीन देना मंदिर इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला, करुणाकर रेड्डी का आरोप
तिरुपति में बुधवार को बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। वरिष्ठ वाईएसआरसीपी नेता और पूर्व टीटीडी चेयरमैन बी करुणाकर रेड्डी ने एनडीए गठबंधन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यटन विकास के नाम पर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की बहुमूल्य ज़मीन ओबेरॉय होटल समूह को सौंपने की साजिश रची।
करुणाकर रेड्डी के मुताबिक, अलिपिरी के पास स्थित 20 एकड़ से अधिक टीटीडी ज़मीन का लेनदेन किया गया। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में इस ज़मीन की कीमत 460 करोड़ रुपये से ज्यादा है। वहीं, खुले बाज़ार में इसकी कीमत 3,000 करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है। इसके बदले सरकार ने पर्यटन विभाग की करीब 18 करोड़ रुपये मूल्य की ज़मीन दी।
करुणाकर रेड्डी ने इस सौदे को सीधी लूट करार दिया। उन्होंने कहा कि यह भगवान वेंकटेश्वर की संपत्ति की खुली लूट है। उन्होंने इसे टीटीडी के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया। उन्होंने दावा किया कि इससे बड़ा कोई भी घोटाला पहले नहीं हुआ।
इसके अलावा, उन्होंने प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना पारदर्शिता के रजिस्ट्रेशन कराए। उन्होंने कहा कि चुपचाप दस्तावेज़ पूरे किए गए, जिससे मंशा और वैधता दोनों पर शक गहराता है। साथ ही, उन्होंने सरकार पर ओबेरॉय समूह को भारी रियायतें देने का आरोप लगाया।
करुणाकर रेड्डी ने कहा कि सरकार ने लगभग 2 करोड़ रुपये का बिल्डिंग फंड माफ किया। इसके अलावा, करीब 26 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी और लीज़ से जुड़े शुल्क भी छोड़ दिए गए। उन्होंने पूछा कि जब ज़मीन देवस्थानम की है, तो निजी कंपनी को इतनी छूट क्यों दी गई।
उन्होंने 2 जून 2007 के एक सरकारी आदेश का भी ज़िक्र किया। यह आदेश दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल में जारी हुआ था। इस आदेश के तहत तिरुमला की सात पवित्र पहाड़ियों को कानूनी संरक्षण मिला। करुणाकर रेड्डी ने कहा कि विवादित ज़मीन भी इसी दायरे में आती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि संरक्षित मंदिर भूमि को किसी निजी पांच सितारा होटल को देना कानून और आस्था दोनों के खिलाफ है। उन्होंने इसे अनैतिक और अभूतपूर्व बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस सौदे से टीटीडी को कोई लाभ नहीं मिला।
पर्यावरण से जुड़े सवाल भी उठे। करुणाकर रेड्डी ने पूछा कि बिना वन मंजूरी निर्माण की अनुमति कैसे मिली। उन्होंने कहा कि ज़मीन पर लाल चंदन के पेड़ मौजूद हैं। उन्होंने यह तर्क भी खारिज किया कि 100 कमरों के होटल के लिए 20 एकड़ पवित्र भूमि ज़रूरी है।
इस बीच, उन्होंने संतों और धार्मिक प्रमुखों की चुप्पी पर नाराज़गी जताई। उन्होंने उनसे आगे आने की अपील की। उन्होंने इस सौदे को भगवान वेंकटेश्वर की संपत्ति की ‘व्यवस्थित लूट’ बताया।
करुणाकर रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और पर्यटन मंत्री कंडुला दुर्गेश को सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने ज़मीन हस्तांतरण रद्द करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने श्रद्धालुओं से टीटीडी संपत्तियों की पवित्रता बचाने का आह्वान किया।
फिलहाल, सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, यह मुद्दा अब राजनीतिक और धार्मिक दोनों मोर्चों पर तूल पकड़ता दिख रहा है।
