नई दिल्ली – दिल्ली में हवा एक बार फिर जहरीली हो गई। इस हफ्ते वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंचा। नतीजतन, दिल्ली सरकार ने गुरुवार से सख्त एंटी-पॉल्यूशन नियम लागू कर दिए। सरकार का मकसद साफ है। वह उत्सर्जन घटाना चाहती है और लोगों की सेहत पर खतरा कम करना चाहती है।
बीते कई दिनों से ठंडी हवाओं की कमी, बढ़ते वाहन और निर्माण गतिविधियों ने हालात बिगाड़ दिए। शनिवार, 13 दिसंबर से लगातार तीन दिन AQI ‘सीवियर’ रहा। इसके बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM ने GRAP-4 लागू किया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को CAQM को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि मौजूदा कदम नाकाफी हैं। कोर्ट ने प्रदूषण से निपटने के लिए व्यापक और असरदार रणनीति की मांग की।
इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली सरकार ने अतिरिक्त प्रतिबंधों का ऐलान किया। इनका सीधा असर दफ्तरों, वाहनों और पेट्रोल पंपों पर पड़ेगा।
दफ्तरों में हाइब्रिड वर्क मॉडल अनिवार्य
सबसे पहले, सरकार ने ट्रैफिक कम करने पर जोर दिया। श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि सभी सरकारी और निजी दफ्तर हाइब्रिड वर्क-फ्रॉम-होम मॉडल अपनाएं। गुरुवार से नियम लागू हो गया। अब किसी भी निजी दफ्तर में 50 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी दफ्तर नहीं आ सकेंगे। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा।
हालांकि, सरकार ने जरूरी सेवाओं को छूट दी। अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवाओं, अग्निशमन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों और अन्य आपात सेवाओं पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसके अलावा, दिहाड़ी मजदूर भी इस दायरे से बाहर रहेंगे। सरकार का मानना है कि कम आवागमन से सड़कों पर भीड़ घटेगी और धुएं में कमी आएगी।
बाहरी गैर-BS-VI वाहनों की एंट्री पर रोक
इसके बाद सरकार ने वाहनों पर शिकंजा कसा। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने ऐलान किया कि BS-VI से नीचे के और दिल्ली से बाहर पंजीकृत वाहन शहर में दाखिल नहीं हो सकेंगे। यह पाबंदी GRAP-4 के दौरान लागू रहेगी।
नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें बॉर्डर और पेट्रोल पंपों पर तैनात हो गई हैं। अधिकारी वाहन के रजिस्ट्रेशन और उत्सर्जन मानक की जांच करेंगे।
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने BS-III और उससे नीचे के वाहनों को मिली राहत भी खत्म कर दी। इससे कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। इसके अलावा, सरकार ने निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकों की एंट्री पर भी रोक लगा दी। सिरसा ने बाहर से आने वाले लोगों से अपील की कि वे केवल BS-VI मानक वाले वाहन ही लेकर आएं।
PUC के बिना नहीं मिलेगा ईंधन
अंत में, सरकार ने पेट्रोल पंपों पर सख्त नियम लागू किया। गुरुवार से बिना PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा। इस कदम से ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर लगाम लगेगी।
PUC यानी पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट एक साधारण उत्सर्जन जांच के बाद मिलता है। दिल्ली के अधिकृत केंद्रों पर यह जांच होती है। दो और तीन पहिया वाहनों के लिए शुल्क 60 रुपये है। चार पहिया वाहनों के लिए 80 रुपये देने होंगे। डीजल वाहनों के लिए यह शुल्क 100 रुपये है। BS-IV और BS-VI वाहनों के लिए यह सर्टिफिकेट 12 महीने तक मान्य रहता है।
कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए सख्त रुख अपनाया है। अब इन नियमों का असर जमीन पर कितना दिखता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।