भारतीय क्रिकेट ने इस पीढ़ी का नया चेहरा बनाने में जल्दी की और इसका भारी मूल्य चुकाया। शुभमन गिल को जल्द ही टीम का पोस्टर-बॉय घोषित किया गया, लेकिन इस कदम ने उनकी और टीम की स्थिति दोनों पर दबाव बढ़ा दिया।
सबसे पहले पृष्ठभूमि देखें। गिल ने 13 महीने बाद अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में वापसी की। चयनकर्ताओं ने उन्हें अगले महान भारतीय क्रिकेटर के रूप में देखा। वे चाहते थे कि वह धोनी, कोहली और रोहित शर्मा की तरह टीम का नेतृत्व करें। लेकिन उनकी हालिया फॉर्म ने इस योजना को चुनौती दी।
गिल की समस्याएँ अब साफ दिख रही हैं। न्यू चंडीगढ़ में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टी20 में उनका पहला-बॉल डक चिंता का संकेत था। सितंबर में टी20 में लौटने के बाद उन्होंने 15 इनिंग्स में सिर्फ 263 रन बनाए। उनका औसत 21.92 और स्ट्राइक-रेट 115.56 रहा, जो अपेक्षित नहीं था। गिल फिलहाल उस खिलाड़ी जैसा नहीं दिख रहे जिसकी टीम को उम्मीद थी।
फॉर्म अस्थायी है, लेकिन क्षमता स्थायी। गिल ने टेस्ट क्रिकेट में नंबर चार पर रन बनाए, लेकिन सीमित ओवरों में रिकॉर्ड निराशाजनक रहा। तीन वनडे में उन्होंने मात्र 43 रन बनाए। 2020 में ऑस्ट्रेलिया के एमसीजी में उनकी पारी की याद आज भी जीवित है।
गिल को जुलाई 2024 में श्रीलंका दौरे के बाद टी20 से आराम दिया गया था। लेकिन रोहित शर्मा के टेस्ट से संन्यास के बाद उन्हें टीम का भविष्य माना गया। उन्होंने टेस्ट और 50-ओवर में कप्तानी पाई और टी20 में सूर्यकुमार यादव के डिप्टी बने। संदेश स्पष्ट था—गिल जल्द ही सभी प्रारूपों में कप्तान बनेंगे।
इस फैसले का भारी मूल्य अन्य खिलाड़ियों ने चुकाया। सफल ओपनिंग जोड़ी अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को हटाया गया। सैमसन को नीचे क्रम में भेजा और बाद में टीम से बाहर कर दिया गया। यह बदलाव गिल को ऊँचा स्थान देने के प्रयास का परिणाम था। संजू ने पिछली फॉर्म में तीन टी20 शतक जड़े थे, लेकिन उन्हें टीम के लिए off-position पर बल्लेबाजी करनी पड़ी और उन्होंने जगह गंवाई।
अब प्रबंधन के सामने बड़ा सवाल है। उन्होंने गिल पर बहुत जल्दी जिम्मेदारी डाल दी। लगातार यात्रा और लगातार उच्च-दबाव वाले मैचों ने मानसिक थकान बढ़ा दी। गिल ने खुद भी बताया कि उनकी थकान मानसिक है, शारीरिक नहीं। गिल बहुत प्रतिभाशाली हैं और जल्द ही वापसी कर सकते हैं, लेकिन क्या टीम और भारत उनके लिए सही निर्णय ले रहे हैं?
गिल का करियर अभी लंबा है, लेकिन चयनकर्ताओं को सोच-समझकर कदम उठाना होगा। टीम ने जिस तेजी से उन्हें अगली पीढ़ी का चेहरा बनाने का दबाव दिया, उससे अन्य खिलाड़ियों और खुद गिल पर भारी बोझ आया। यह सवाल अब 140 करोड़ भारतीयों के सामने है—क्या भारतीय क्रिकेट ने सही निर्णय लिया है?