इंडिगो संकट गहराया: एक दिन में 1,000 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, यात्रियों में हड़कंप

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इंडिगो ने सप्ताहांत की शुरुआत भारी अव्यवस्था के साथ की। एयरलाइन लगातार उड़ानें रद्द कर रही है और शनिवार को भी बड़े पैमाने पर रद्दीकरण की आशंका बनी हुई है। शुक्रवार को हालात और बिगड़ गए। रद्द उड़ानों की संख्या 1,000 के पार निकल गई। यह इंडिगो के इतिहास का सबसे बड़ा ऑपरेशनल झटका बन गया। शनिवार को सीईओ पीटर एल्बर्स ने वीडियो संदेश जारी किया और कहा कि आज रद्द उड़ानों की संख्या 1,000 से कम रह सकती है, लेकिन संकट बना रहेगा।

इसके बाद देशभर के एयरपोर्ट तनाव और अफरा-तफरी में बदल गए। यात्रियों ने लंबी कतारों में इंतज़ार किया, अपडेट खोजे और अपना सामान ढूंढने की कोशिश की। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर नाराज़गी दिखाई क्योंकि टिकट के दाम अचानक बढ़ गए। कई रूटों पर किराया दोगुना से ज़्यादा हो गया। लोग दूसरी उड़ान पकड़ने की कोशिश में और भी परेशानी में फंस गए।

अब बड़ा सवाल सामने आया—इंडिगो इतनी उड़ानें क्यों रद्द कर रहा है?

इंडिगो ने जवाब दिया कि एयरलाइन ने एक साथ कई ऑपरेशनल चुनौतियों का सामना किया। इसमें सबसे बड़ा कारण FDTL यानी फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियम रहे। ये नियम पायलटों और क्रू को तय आराम देते हैं। इंडिगो ने यह सिस्टम लागू किया और उसी समय 26 अक्टूबर से अपनी विंटर शेड्यूल में तेज़ बढ़ोतरी कर दी। नतीजतन बड़ी संख्या में पायलट आराम पर चले गए और फ्लाइट संचालन अचानक गड़बड़ा गया। एयरलाइन उपलब्ध पायलटों के बिना भारी शेड्यूल चला नहीं पाई।

इस संकट ने किराए को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। इंडिगो की उड़ानों के रद्द होने से मांग बढ़ी और टिकटों की कीमतें आसमान छूने लगीं। कोलकाता से मुंबई की एक-स्टॉप स्पाइसजेट इकोनॉमी टिकट 90,000 रुपये तक पहुंच गई। मुंबई से भुवनेश्वर की एयर इंडिया टिकट 84,000 रुपये के पास दिखी। अन्य व्यस्त रूटों पर भी यही रुझान देखने को मिला।

इस बीच, एविएशन रेगुलेटर DGCA ने स्थिति संभालने के लिए दखल दिया। शुक्रवार देर रात DGCA ने FDTL नियमों को रोक दिया ताकि एयरलाइनें अपने शेड्यूल को स्थिर कर सकें। इसके अलावा, DGCA ने चार सदस्यीय जांच समिति बनाई। यह टीम पता लगाएगी कि अव्यवस्था की जड़ क्या है। DGCA ने कहा कि इंडिगो की आंतरिक निगरानी, संचालन क्षमता और अनुपालन योजना में खामियां दिख रही हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच ज़रूरी है।

अब इंडिगो कठिन दौर में है। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन होने के कारण उसकी हर समस्या पूरे एविएशन सिस्टम पर असर डालती है। पायलटों की कमी, बढ़ा शेड्यूल और नए नियम—इन तीनों ने मिलकर संकट पैदा किया। यात्री अभी भी अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। एयरपोर्ट भीड़ से भरे हैं और टिकट की कीमतें ऊंची हैं।

अगले कुछ दिनों में इंडिगो को तेज़ कदम उठाने होंगे। शेड्यूल और क्रू प्रबंधन में सुधार ही राहत दे सकता है। वहीं, DGCA की जांच पूरे उद्योग के लिए एक सबक बन सकती है—योजना में ज़रा सी चूक भी बड़े संकट को जन्म दे सकती है।

फिलहाल, यात्रियों को स्थिति सामान्य होने तक इंतज़ार करना पड़ सकता है।


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