प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले देश की लोकतांत्रिक ऊर्जा और बिहार चुनाव परिणामों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने लोकतंत्र को जिया है और लगातार मजबूत किया है। उन्होंने बिहार में महिलाओं की बड़ी भागीदारी को लोकतंत्र की शक्ति बताया। फिर उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि वह संसद में ड्रामा न करे बल्कि काम करे।
सबसे पहले, पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने साबित किया है कि लोकतंत्र डिलीवर कर सकता है। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव के नतीजों से विपक्ष को घबराना नहीं चाहिए और संसद का सत्र उत्पादक बनाना चाहिए। उन्होंने अपनी गठबंधन पार्टीयों को भी चेताया कि जीत उन्हें अहंकार की ओर न ले जाए।
इसके बाद, पीएम मोदी ने विपक्ष को सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “ड्रामा मत करो, डिलीवर करो।” उन्होंने कहा कि अब तक उम्मीद थी कि विपक्ष बिहार हार को स्वीकार कर लेगा, लेकिन उनके बयानों से साफ दिखता है कि वे अभी भी असहज हैं।
फिर उन्होंने कहा कि वह विपक्ष को “टिप्स” देने के लिए तैयार हैं—टिप्स कि कैसे वे अपनी रणनीति बदलें और बेहतर प्रदर्शन करें। उन्होंने सुझाव दिया कि चुनावी हार के बाद विपक्ष को अपना कोर्स बदलना चाहिए और नई दिशा में काम करना चाहिए। इस बयान की पृष्ठभूमि में बिहार विधानसभा चुनावों में NDA की बड़ी जीत है। एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाले महागठबंधन या INDIA ब्लॉक को केवल 35 सीटें मिलीं।
इसके साथ ही, संसद का शीतकालीन सत्र टकराव भरा दिख रहा है। विपक्ष, मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर बहस की मांग कर रहा है। सरकार ने हालांकि इस पर स्पष्ट सहमति नहीं दी है। सरकार ने 10 नए विधेयकों को पेश करने की तैयारी की है और वंदे मातरम के 150 वर्ष पर चर्चा तय की है। सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा।
रविवार को तीन महत्वपूर्ण बैठकें हुईं—रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक और लोकसभा-राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठकें। इन बैठकों में SIR पर बहस विपक्ष की मुख्य मांग रही। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने चेतावनी दी कि बिना बहस के सदन नहीं चलेगा। अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार को कहा कि अगर सदन बाधित होता है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
हालांकि, बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने तनाव कम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता ने यह नहीं कहा कि वे SIR के मुद्दे पर सदन नहीं चलने देंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार चर्चा जारी रखेगी ताकि सदन सुचारू रूप से चले। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उत्पादकता बढ़ाने के लिए सदन बाधित नहीं होना चाहिए।
अब शीतकालीन सत्र ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब चुनावी राजनीति और संसदीय टकराव दोनों तेज हैं। सरकार विधायी काम आगे बढ़ाना चाहती है। विपक्ष जवाब और बहस चाहता है। आने वाले दिन तय करेंगे कि संसद बहस करेगी या ड्रामा।