विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को वैश्विक अर्थव्यवस्था को घेर रहे बढ़ते जोखिमों पर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने यह संदेश IIM-कोलकाता में मानद डॉक्टरेट प्राप्त करने के बाद दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया अब ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां राजनीति सीधे अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। इसलिए, भारत को अपनी सप्लाई चेन को और मजबूत और विविध बनाना होगा।
सबसे पहले, जयशंकर ने कहा कि अनिश्चित दुनिया में राजनीति, अर्थव्यवस्था को पछाड़ देती है। उन्होंने कहा कि भारत को राष्ट्रीय जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए लगातार सप्लाई स्रोतों का विस्तार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह रणनीति अब केवल विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है।
इसके बाद, उन्होंने अमेरिका की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका, जो लंबे समय तक विश्व व्यवस्था का आधार रहा, अब नए और कड़े नियमों के साथ देशों से जुड़ता है। वह अब बहुपक्षीय ढांचे के बजाय द्विपक्षीय सौदों को प्राथमिकता देता है। यह टिप्पणी उस समय आई जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाया है और रूसी तेल खरीद पर 25% अतिरिक्त दंड भी लगाया है।
फिर, जयशंकर ने चीन की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा अपने नियमों से चलता है और आज भी ऐसा ही कर रहा है। उन्होंने बताया कि दुनिया का एक-तिहाई उत्पादन चीन में होता है, इसलिए वैश्विक सप्लाई चेन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध, तनाव और जलवायु से जुड़ी घटनाएँ इन जोखिमों को और बढ़ाती हैं।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि बाकी देश अब हर स्थिति के लिए सुरक्षा कवच तैयार करते हैं। वे नए व्यापार मार्ग, नए साझेदार और नए सप्लाई नेटवर्क बनाते हैं। वे किसी एक देश पर निर्भरता घटाते हैं। उन्होंने कहा कि यही वैश्विक व्यवस्था का नया चरित्र बन गया है।
इसके बाद, जयशंकर ने भारत की प्रगति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब बुनियादी ढांचे में एशिया की सफल अर्थव्यवस्थाओं की बराबरी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने हाईवे, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, ऊर्जा और बिजली सेक्टर में तेज सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया अब भारत की क्षमता को गंभीरता से देख रही है।
अंत में, उन्होंने कहा कि भारत अब नए व्यापार समझौते बना रहा है। वह नई कनेक्टिविटी परियोजनाएँ तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक अस्थिरता से निपटने के लिए मजबूत, लचीली और विश्वसनीय सप्लाई चेन बनानी होगी। उन्होंने कहा कि यह समय रणनीतिक चौकसी और आर्थिक फुर्ती का है।
जयशंकर का संदेश साफ था—राजनीतिक भूचाल आर्थिक ढांचे को हिला रहे हैं, और भारत को अब समझदारी, गति और दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़ना होगा।