नेशनल हेराल्ड FIR पर BJP–कांग्रेस में टकराव तेज, दोनों दलों ने एक-दूसरे पर बड़े आरोप लगाए
नई दिल्ली – नेशनल हेराल्ड मामले में ताज़ा FIR ने रविवार को BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया। FIR में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नाम आने के बाद दोनों दल पुराने विवाद पर फिर लौट आए। यह मामला 2008 से जुड़ा है और हर राजनीतिक मौसम में सुर्खियों में लौट आता है।
सबसे पहले, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने FIR पर सीधा हमला किया। उन्होंने इसे “फर्जी” मामला बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह कांग्रेस नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार दवाब बनाकर विपक्ष की आवाज कमजोर करना चाहती है।
इसके बाद, BJP नेता रविशंकर प्रसाद सामने आए। उन्होंने कहा कि मोदी उस समय सत्ता में नहीं थे जब इस मामले में निजी शिकायत दर्ज हुई थी। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस की “राजनीतिक प्रताड़ना” वाली लाइन तथ्य नहीं बदलती।
प्रसाद ने मामले की पृष्ठभूमि भी रखी। उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड की प्रकाशक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) पर लगभग 90 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो कांग्रेस ने दिया था। फिर, उन्होंने आरोप लगाया कि यंग इंडिया लिमिटेड नाम की नई कंपनी ने AJL के शेयर सिर्फ 50 लाख रुपये में खरीद लिए। उसके बाद, कांग्रेस ने 90 करोड़ का कर्ज माफ कर दिया। प्रसाद ने कहा कि इस सौदे के बाद AJL के सभी शेयर यंग इंडिया के पास चले गए और इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 76% हिस्सेदारी थी। उन्होंने इसे “स्पष्ट लूट” बताया।
उधर, कांग्रेस ने इस आरोप पर पलटवार किया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि FIR में कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में “न पैसा चला, न संपत्ति बदली” और सरकार ने “मनगढ़ंत मनी लॉन्ड्रिंग” का आरोप जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यंग इंडिया सिर्फ AJL के शेयर रखने के लिए बना गैर-लाभकारी संगठन है। उनके अनुसार, AJL आज भी वही संपत्ति चलाता है और “राजनीतिक दुर्भावना” ही इस जांच को आगे बढ़ा रही है।
इसी बीच, जयराम रमेश ने फिर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “मोदी-शाह की जोड़ी” कांग्रेस नेतृत्व को डराने और बदनाम करने की राजनीति में लगी है। उन्होंने दावा किया कि जो लोग विपक्ष को धमकाते हैं, वे खुद डर में जीते हैं। उन्होंने दोहराया कि नेशनल हेराल्ड मामला पूरी तरह “बनावटी” है और अंत में न्याय जीतेगा।
इस विवाद ने एक बार फिर भारत की दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों के बीच वैचारिक और कानूनी लड़ाई को तेज कर दिया है। जैसे-जैसे चुनावी मौसम करीब आता है, दोनों दल अपने-अपने समर्थकों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए, यह मामला अगले कुछ दिनों में राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण केंद्र बने रहने की पूरी संभावना रखता है।
