पुतिन के भारत दौरे की चर्चा सबसे पहले अगस्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के मॉस्को दौरे के दौरान हुई थी। उस समय दौरे की तारीखें अंतिम रूप में तय नहीं की गई थीं। बाद में, पीएम मोदी और पुतिन चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में मिले। उन्होंने पुतिन की लिमोज़िन में लगभग एक घंटे लंबी वार्ता की।
विश्लेषकों का कहना है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करेगा। भारत रूस से रक्षा उपकरणों का प्रमुख खरीदार है, और ऊर्जा आयात दोनों देशों के बीच संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस दौरे के दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा कर सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि भारत इस दौरे का उपयोग लाभकारी ऊर्जा सौदे करने और व्यापक आर्थिक साझेदारी बढ़ाने के लिए कर सकता है। यह दौरा उस समय हो रहा है जब भारत पश्चिमी देशों और पारंपरिक सहयोगी रूस के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है।
क्रेमलिन ने कहा कि दौरे की तैयारियां पहले से शुरू हो गई हैं। सुरक्षा इंतजाम, कूटनीतिक व्यवस्था और कार्यक्रम की रूपरेखा दोनों सरकारें तय कर रही हैं। दौरे में औपचारिक बैठकें, द्विपक्षीय चर्चा और स्वागत समारोह शामिल होंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा भारत-रूस संबंधों में मजबूती का प्रतीक होगा। यह दोनों देशों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साझेदारी को बढ़ावा देगा और वैश्विक दबाव के बीच रणनीतिक सहयोग को कायम रखने का संकेत है।
कुल मिलाकर, पुतिन का दौरा दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को पुनः पुष्ट करेगा। यह भारत और रूस के लिए व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा क्षेत्रों में नई संभावनाओं को खोलने का अवसर भी होगा।