रावलपिंडी — अडियाला जेल प्रशासन ने बुधवार को इमरान खान की सेहत और मौत से जुड़ी सभी अफ़वाहों को खारिज किया। अधिकारियों ने साफ कहा कि इमरान खान जेल में ही हैं, स्वस्थ हैं और पूरी चिकित्सीय देखभाल ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसी तरह की स्थानांतरण की बात सच नहीं है।
इसी बीच, सोशल मीडिया पर उनकी मौत की अफ़वाहें तेज़ी से फैलती रहीं। कई खातों ने दावा किया कि किसी ने उन्हें जेल में “मार डाला” और उनका शव बाहर ले गया। ‘अफ़ग़ानिस्तान टाइम्स’ नाम के एक अकाउंट ने इस दावे को “विश्वसनीय सूत्रों” से जोड़कर और उकसाया। हालांकि, किसी सरकारी संस्था ने इन दावों की पुष्टि नहीं की।
अब, पृष्ठभूमि समझना ज़रूरी है। अगस्त 2023 से इमरान खान कई मामलों में जेल में हैं। सरकार ने एक महीने से अधिक समय से उनसे मिलने पर बिना औपचारिक घोषणा के रोक लगा रखी है। इसके कारण उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ ने सरकार से आधिकारिक बयान की मांग की। पीटीआई ने तुरंत परिवार से मिलने की अनुमति देने की भी अपील की।
इसी दौरान, उनकी तीन बहनों—नूरीन नियाज़ी, अलेमा खान और डॉ. उज्मा खान—ने जेल के बाहर प्रदर्शन किया। वे उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थीं। लेकिन, तनाव तब बढ़ा जब पिछले हफ्ते पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की। बहनों ने पंजाब पुलिस प्रमुख उस्मान अनवर को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के उन पर हमला किया।
नूरीन नियाज़ी ने बताया कि वे शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अचानक सड़क की लाइटें बंद कर दीं और अंधेरा फैलाया। इसके बाद पुलिसकर्मी उन पर टूट पड़े। नूरीन ने कहा, “71 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे बाल पकड़कर जमीन पर गिराया और सड़क पर घसीटा। मेरे शरीर पर चोटें आईं।” उन्होंने आरोप लगाया कि महिला प्रदर्शनकारियों को भी थप्पड़ मारे गए और घसीटा गया।
दूसरी ओर, खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने भी इमरान खान से मिलने की कोशिश की, लेकिन सात बार प्रयास करने के बावजूद उन्हें अनुमति नहीं मिली। इससे सरकार और पीटीआई के बीच तनाव और बढ़ गया।
फिर भी, जेल प्रशासन ने दोहराया कि इमरान खान सुरक्षित हैं। अधिकारी लगातार उनकी सेहत की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की मौत की खबर झूठ है और अफ़वाह फैलाने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
अंत में, हालात साफ हैं। इमरान खान जेल में मौजूद हैं, स्वस्थ हैं और उपचार ले रहे हैं। अफ़वाहें सोशल मीडिया की उपज हैं, जबकि प्रशासन लगातार पारदर्शिता का दावा कर रहा है। हालांकि, परिवार को उनसे मिलने नहीं देने और पुलिस कार्रवाई ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
राजनीतिक तनाव, सोशल मीडिया की भ्रामक खबरें और परिवार की बेचैनी—ये सभी तत्व पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल को और गहरा कर रहे हैं।