राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 9 भाषाओं में संविधान का डिजिटल संस्करण जारी किया
नई दिल्ली – बुधवार को भारत ने 76वें संविधान दिवस का आयोजन किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस अवसर पर संविधान के डिजिटल संस्करण को नौ भाषाओं में जारी किया। इसमें मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओड़िया और असमिया शामिल हैं। उन्होंने कहा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाना देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। हमारे संविधान निर्माताओं ने हमेशा व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया।”
राष्ट्रपति मुर्मु ने पुराने संसद भवन के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में समारोह के दौरान यह संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान न केवल कानूनी ढांचा है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक पहचान और सामाजिक न्याय की नींव भी है।
उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि संविधान की आत्मा हमेशा यह दिखाती रही है कि भारत एक है और हमेशा एक रहेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संविधान कमजोर वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्धता दर्शाता है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उप राष्ट्रपति और राज्यसभा अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री और संसद के सदस्य शामिल हुए। मंत्रालय ने कहा कि यह आयोजन देशभर में संविधान दिवस की गंभीरता और महत्व को दर्शाने के लिए आयोजित किया गया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संविधान को गरीबों का रक्षक बताते हुए लोगों से प्रतिज्ञा लेने को कहा। उन्होंने कहा, “हम संविधान पर कोई हमला नहीं होने देंगे और मैं इसके खिलाफ सबसे पहले खड़ा रहूंगा।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संविधान के मूल सिद्धांतों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने न्याय, समानता, स्वतंत्रता, भाईचारे, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद जैसे मूलभूत मूल्य संविधान में सुरक्षित होने की बात कही।
देशभर में स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में संविधान की पढ़ाई, क्विज़, वाचन और शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई राज्यों में प्रांरभिक और माध्यमिक विद्यालयों में संविधान का पाठ पढ़ाया गया। डिजिटल माध्यमों पर भी कार्यक्रम लाइव प्रसारित किए गए ताकि नागरिक आसानी से इसमें भाग ले सकें।
डिजिटल संस्करण के जारी होने से करोड़ों लोगों को संविधान अपने क्षेत्रीय भाषा में समझने और पढ़ने का अवसर मिलेगा। अधिकारियों ने इसे प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कदम बताया। इसका उद्देश्य नागरिकों को संविधान के मूल सिद्धांतों से जोड़ना और लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करना है।
समारोह में नेताओं ने सभी को याद दिलाया कि संविधान केवल कानून का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक पहचान और एकता की नींव भी है। नागरिकों और नेताओं को मिलकर इसे संरक्षित करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
