कर्नाटक में सत्ता-साझेदारी पर ‘गुप्त समझौते’ को लेकर शिवकुमार का बड़ा बयान
कनकपुरा – मंगलवार को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य की सत्ता-साझेदारी पर चल रही खींचतान को नई दिशा दे दी। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस के पाँच–छह नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर एक गुप्त समझौता हुआ था। हालांकि, उन्होंने तुरंत जोड़ा कि वह इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर बोलकर पार्टी को कमजोर नहीं करना चाहते।
परिस्थिति की पृष्ठभूमि
कांग्रेस ने मार्च 2023 में कर्नाटक में जीत हासिल की। इसके बाद से ही सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच पावर ट्रांसफर की चर्चा तेज रही। तब से समर्थक दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक इस राजनीतिक खींचतान को हवा देते रहे।
इसी बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को केंद्रीय नेतृत्व से कहा कि वह जल्द फैसला करें, ताकि “भ्रम खत्म हो सके।”
कैसे शुरू हुई ‘डील’ की कहानी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मार्च 2023 में दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर शीर्ष नेताओं ने कथित समझौते को अंतिम रूप दिया। बैठक में सिद्धारमैया, शिवकुमार, खड़गे, के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला मौजूद थे।
हालांकि, खड़गे ने मंगलवार को किसी भी नेतृत्व बदलाव पर सार्वजनिक चर्चा को गलत बताया और कहा कि वह इस विषय पर यहाँ बात नहीं करेंगे।
सिद्धारमैया का बदलता रुख
साल भर में सिद्धारमैया का सार्वजनिक रुख कई बार बदला।
पहले उन्होंने कहा कि “सरकार पाँच साल पूरे करेगी।”
फिर उन्होंने जुलाई में घोषणा की, “मैं पूरा कार्यकाल मुख्यमंत्री रहूँगा।”
लेकिन 22 नवंबर को खड़गे के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा, “हाईकमान फैसला करेगा।”
दो दिन बाद उन्होंने जोड़ा, “हाईकमान चाहेगा तो मैं जारी रहूँगा।”
मंगलवार को बेंगलुरु में उन्होंने दोहराया, “सबसे अंत में फैसला हाईकमान ही लेगा। भ्रम खत्म करना है तो निर्णय जरूरी है।”
शिवकुमार ने क्यों संभाली संयम की राह
कनकपुरा में शिवकुमार ने तीखापन दिखाने से इनकार किया। उन्होंने कहा,
“मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे मुख्यमंत्री बनाओ। यह पाँच–छह लोगों के बीच की डील है। मैं इसे सार्वजनिक नहीं करूँगा। मैं पार्टी को कमजोर नहीं करना चाहता।”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पार्टी और कार्यकर्ता ही उनकी ताकत हैं।
अंदरूनी समीकरण क्या कहते हैं
सिद्धारमैया के करीबी लोग किसी भी समझौते से इनकार कर रहे हैं।
वहीं शिवकुमार के समर्थक हाईकमान से स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
वे यह भी दावा करते हैं कि शिवकुमार किसी बगावती रुख की ओर नहीं जाएंगे क्योंकि वह गांधी परिवार के बेहद करीबी हैं।
एक समर्थक ने कहा, “शिवकुमार टकराव नहीं चाहते, लेकिन उनके पास बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन है। उन्हें लगता है कि पार्टी को समझौते का सम्मान करना चाहिए, जबकि सिद्धारमैया को भी आगे महत्वपूर्ण भूमिका मिलनी चाहिए।”
