सोमवार को एक बड़ी क्षति महसूस की, जब धर्मेंद्र ने 89 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। वह अपने मुंबई स्थित घर में थे। इस महीने की शुरुआत में उन्होंने सांस संबंधी दिक्कतों का सामना किया और इलाज के लिए ब्रीच कैंडी अस्पताल गए। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार कमजोर होती गई। आखिरकार, छह दशक की चमकदार सिनेमाई यात्रा थम गई।
धर्मेंद्र ने भारतीय सिनेमा को मजबूती दी। उन्होंने 1960 की फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से करियर शुरू किया। शुरू में उन्होंने खुद को साबित करने के लिए कड़ी मेहनत की। धीरे-धीरे उन्होंने अपना दायरा बढ़ाया। वह एक्शन, रोमांस और कॉमेडी—हर शैली में जमकर चमके। उन्होंने अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेज़ेंस से दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा।
इसके बाद, उन्होंने कई यादगार फिल्में दीं। शोले में उन्होंने वीरू बनकर दर्शकों का दिल जीता। प्रतीज्ञा, मेरा गाँव मेरा देश, चुपके चुपके, यादों की बारात, फूल और पत्थर, सत्यकाम और धरम वीर जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय को नई ऊंचाई दी। हर दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक सफल फिल्में दीं।
धर्मेंद्र ने फिल्म निर्माण में भी कदम रखा। उन्होंने घायल बनाई, जिसमें सनी देओल ने शानदार अभिनय किया। फिल्म ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। इससे उनके काम में विविधता और बढ़ी। 2012 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी लोकप्रियता और योगदान का प्रमाण बना।
धर्मेंद्र की पर्सनल लाइफ भी चर्चा में रही। लुधियाना के पास एक छोटे गांव में जन्मे धर्मेंद्र ने 19 साल की उम्र में प्रकाश कौर से शादी की। बाद में उन्होंने अभिनेत्री हेमा मालिनी से शादी की। परिवार बड़ा और मजबूत रहा। वह प्रकाश कौर, हेमा मालिनी और छह बच्चों—सनी देओल, बॉबी देओल, ईशा देओल, अहाना देओल, अजीता और विजेता—को पीछे छोड़ गए।
हालांकि उम्र बढ़ती गई, लेकिन धर्मेंद्र ने खुद को सीमित नहीं किया। वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे। वह खेती-बाड़ी करते हुए वीडियो साझा करते रहे। वह ट्रैक्टर चलाते दिखे। उन्होंने अपने प्रशंसकों को सरल जीवन और सेहतमंद आदतों का संदेश दिया। वह हमेशा सरलता, स्नेह और विनम्रता के साथ सामने आए।
फिल्मों में भी उन्होंने पूरी ऊर्जा के साथ काम किया। 2024 में वह तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया में नजर आए। अब प्रशंसक उन्हें आखिरी बार इक्कीस में देखेंगे, जो 25 दिसंबर को रिलीज़ होगी।
धर्मेंद्र ने बॉलीवुड को नई पहचान दी। उन्होंने दर्शकों को हंसाया, रुलाया और प्रेरित किया। उन्होंने मेहनत, ईमानदारी और जुनून के साथ अभिनय किया। आज उनका जाना एक युग का अंत है। लेकिन उनकी फिल्में, उनके डायलॉग और उनकी मुस्कान हमेशा जीवित रहेंगी।