दिल्ली–NCR में अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े 25 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, 9 शेल कंपनियों की जांच तेज

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दिल्ली – प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार सुबह दिल्ली और एनसीआर में अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े 25 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। एजेंसी ने यह कार्रवाई रेड फोर्ट ब्लास्ट के बाद तेज हुई जांच के बीच की। केंद्र सरकार ने हाल ही में विश्वविद्यालय के सभी रिकॉर्ड की फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया था। इसी आदेश के तुरंत बाद ईडी ने अपनी टीमें मैदान में उतारीं।

अल फलाह यूनिवर्सिटी हरियाणा में स्थित है। जांच एजेंसियों ने यहां काम करने वाले तीन डॉक्टरों को 10 नवंबर के रेड फोर्ट ब्लास्ट में संदिग्ध पाया। इस सुराग ने जांच को नई दिशा दी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की अध्यक्षता की और जांच की प्रगति पर विस्तृत समीक्षा की। बैठक लगभग डेढ़ घंटे चली। इसके बाद अधिकारियों ने ईडी को वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला जांचने को कहा।

ईडी की टीमें मंगलवार तड़के सक्रिय हुईं। उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के शक पर ध्यान केंद्रित किया। जानकारी के अनुसार, अल फलाह समूह से जुड़ी नौ शेल कंपनियाँ जांच के दायरे में हैं। सभी कंपनियाँ एक ही पते से संचालित होती हैं। यह तथ्य एजेंसी के लिए बड़ा अलर्ट बन गया।

ईडी को शुरुआती जांच में कई संदिग्ध पैटर्न मिले। उदाहरण के तौर पर कई कंपनियाँ अपने बताए पते पर सक्रिय नहीं थीं। कई फर्मों ने एक ही मोबाइल नंबर और ईमेल का उपयोग किया। कई संस्थानों ने EPFO और ESIC में कोई रिकॉर्ड दाखिल नहीं किया, जबकि वे बड़े स्तर के संचालन का दावा करती हैं। कई कंपनियों में एक जैसी निदेशक जानकारी, कमजोर KYC, बैंक के जरिए न्यूनतम वेतन भुगतान और HR रिकॉर्ड का अभाव मिला। कंपनियों के रजिस्ट्रेशन पैटर्न भी एक-दूसरे से मिलते-जुलते थे। इन संकेतों ने एजेंसी का शक और गहरा कर दिया।

उधर, विश्वविद्यालय के UGC और NAAC मान्यता दावों में भी शुरुआती स्तर पर कई असंगतियाँ सामने आईं। अधिकारी अब इन दावों की सत्यता की जांच कर रहे हैं।

इस बीच बुधवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने महत्वपूर्ण कार्रवाई की। क्राइम ब्रांच ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी को तलब किया। पुलिस ने उन्हें मान्यता, फंडिंग और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों के साथ पेश होने का निर्देश दिया। ट्रस्ट के तहत नौ संस्थान चलते हैं, जिनमें अल फलाह मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन भी शामिल है। ब्लास्ट केस में आरोपी डॉक्टर उमर नबी और मुजम्मिल गनई इसी फाउंडेशन से जुड़े थे।

इसी दौरान एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने बड़ा कदम उठाया। AIU ने अल फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता निलंबित कर दी और संस्था को तुरंत अपने प्लेटफॉर्म्स से AIU का नाम और लोगो हटाने का आदेश दिया।

रेड फोर्ट के पास हुए कार विस्फोट में 12 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, एजेंसियाँ वित्तीय नेटवर्क, संस्थागत कड़ियों और संदिग्धों की भूमिकाओं की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।


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