तेजस्वी यादव ने राघोपुर में बढ़त बना ली। यह बढ़त पारंपरिक आरजेडी गढ़ में उनकी पकड़ को दिखाती है। दूसरी ओर, पहली बार चुनाव लड़ रहीं गायिका मैथिली ठाकुर ने अलीनगर में बढ़त हासिल की। उनकी एंट्री ने मुकाबले में नई दिलचस्पी पैदा की। दोनों ही गठबंधनों की शुरुआती सफलताओं ने टक्कर को रोमांचक बनाए रखा।
आज की गिनती यह तय करेगी कि बिहार एक बार फिर नीतीश कुमार को मौका देता है या तेजस्वी यादव को नया नेतृत्व सौंपता है। राज्य में 243 सीटों के लिए 6 और 11 नवंबर को मतदान हुआ था। चुनाव आयोग ने पूरे मतदान क्षेत्र में गिनती की प्रक्रिया का सख्त निरीक्षण किया।
बिहार ने इस बार 67.13% का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया। यह राज्य के चुनाव इतिहास की सबसे बड़ी भागीदारी है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों ने चुनाव में गहरी रुचि दिखाई। विश्लेषकों ने कहा कि इस वृद्धि में महिलाओं की बड़ी भूमिका रही। महिलाएँ लगातार बिहार की राजनीति में निर्णायक शक्ति बनती जा रही हैं।
एग्जिट पोल पहले ही एनडीए को बड़ी जीत का अनुमान दे चुके थे। अधिकांश सर्वेक्षणों ने गठबंधन को स्पष्ट बहुमत में दिखाया। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव ने इन अनुमानों को खारिज किया और दावा किया कि महागठबंधन बड़ी जीत के साथ सरकार बनाएगा। उनके बयानों ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया।
दोनों गठबंधनों ने इस चुनाव में अपने सबसे बड़े नेताओं को मैदान में उतारा। एनडीए ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा पर जोर दिया। वहीं महागठबंधन ने जेเจडी नेता तेज प्रताप और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार को प्रमुख मोर्चों पर उतारा। इन नेताओं की सीटों पर लगातार राष्ट्रीय नजरें बनी रहीं।
इन चुनावों के नतीजे बिहार की राजनीति को नई दिशा देंगे। जनता तय करेगी कि वह नीतीश कुमार के लंबे शासन को आगे बढ़ाना चाहती है या तेजस्वी यादव के नेतृत्व में नया अध्याय शुरू करना चाहती है। रुझान तेज़ी से बदल रहे हैं और टीम लगातार गिनती कर रही है। बिहार अंतिम फैसले का इंतज़ार कर रहा है, जो आने वाले पाँच वर्षों की राजनीति को आकार देगा।
जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ रहा है, राजनीतिक खेमे हर अपडेट पर नजर रखे हुए हैं। अंतिम परिणाम यह बताएंगे कि ऊर्जावान चुनाव अभियान के बाद जनता का मूड किस ओर झुका।