वॉशिंगटन – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में दिए बयान में संकेत दिया कि उनकी सरकार अब H-1B वीज़ा नीति को नए दृष्टिकोण से देख रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को दुनिया भर से अधिक कुशल लोगों की जरूरत है क्योंकि कई उद्योगों में देश के पास “कुछ विशेष प्रतिभाएं” नहीं हैं।
ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “अमेरिका में कुछ प्रतिभाएं नहीं हैं। लोगों को सीखना होगा।” इस बयान के बाद कई विशेषज्ञों ने माना कि राष्ट्रपति शायद अपने कठोर आव्रजन रुख में नरमी ला रहे हैं। लेकिन इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्थिति स्पष्ट की।
बेसेंट ने कहा कि यह नीति वास्तव में ज्ञान हस्तांतरण (Knowledge Transfer) की दिशा में है, न कि विदेशी कर्मचारियों से अमेरिकी नौकरियां छीनने की। उन्होंने समझाया, “राष्ट्रपति का विज़न यह है कि विदेशी विशेषज्ञ तीन से सात साल तक यहां आएं, अमेरिकी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें और फिर अपने देश लौट जाएं। उसके बाद अमेरिकी कर्मचारी पूरी तरह काम संभालें।”
बेसेंट ने यह भी कहा कि फिलहाल अमेरिका कई क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की कमी झेल रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया, “हमने सालों से न तो जहाज बनाए हैं और न ही सेमीकंडक्टर। इसलिए विदेशी साझेदारों का आना, सिखाना और फिर लौट जाना, एक बेहतरीन कदम है।”
ट्रम्प के इस दृष्टिकोण को अमेरिकी उद्योगों के पुनर्निर्माण से जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय से बेरोजगार लोगों को अचानक तकनीकी नौकरियों में नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि उनके पास जरूरी कौशल नहीं है। उन्होंने कहा, “अमेरिका को ऐसे लोगों की जरूरत है जो आकर हमें सिखा सकें।”
राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि H-1B वीज़ा पर लगी पाबंदियां अब उनकी प्रशासनिक प्राथमिकता नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमें अन्य देशों से प्रतिभा लानी होगी। हमारे पास हर क्षेत्र की विशेषज्ञता नहीं है। लोग सीखेंगे, तभी अमेरिका आगे बढ़ेगा।”
विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति विदेशी प्रतिभा और अमेरिकी श्रमिक प्रशिक्षण को जोड़ने की दिशा में उठाया गया कदम है। इससे अमेरिका अपने महत्वपूर्ण उद्योगों—जैसे रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर उत्पादन—को फिर से मजबूत बना सकेगा।
बेसेंट ने दोहराया, “यह नीति अमेरिकी नौकरियां छीनने के लिए नहीं, बल्कि अमेरिकी श्रमिकों को मजबूत करने के लिए है।”
ट्रम्प प्रशासन इस नई नीति के जरिए विदेशी विशेषज्ञता और घरेलू प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाना चाहता है। इससे अमेरिका न केवल अपने उद्योगों को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि भविष्य के लिए स्वावलंबी तकनीकी कार्यबल भी तैयार करेगा।
अब बहस इस पर केंद्रित है कि क्या यह “प्रशिक्षण मॉडल” वास्तव में अमेरिकी उद्योगों को पुनर्जीवित कर पाएगा या नहीं। फिलहाल, ट्रम्प का संदेश स्पष्ट है—विदेशी कौशल का उपयोग अमेरिका की ताकत बढ़ाने के लिए होगा, न कि उसे कमजोर करने के लिए।