मुंबई में महिला विश्व कप जीत पर बोली हरमनप्रीत कौर — “हम इस पल का लंबे समय से इंतज़ार कर रहे थे”

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नवी मुंबई – मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में रविवार रात भारत की महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया। कप्तान हरमनप्रीत कौर और उपकप्तान स्मृति मंधाना ने खिताबी जीत के बाद एक भावनात्मक आलिंगन साझा किया। दोनों ने वर्षों के इंतज़ार और असफलताओं के बाद आखिरकार विश्व कप अपने नाम किया। भारत ने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराया।

हरमनप्रीत ने मुस्कराते हुए कहा, “हम इस पल का लंबे समय से इंतज़ार कर रहे थे। हर बार हारने के बाद सोचते थे कि फिर से शुरुआत करनी होगी। आज वो सपना पूरा हुआ।”

यह मैच नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में हुआ — वही मैदान जहाँ भारत ने हमेशा शानदार क्रिकेट खेला है। हरमनप्रीत ने बताया, “जब हमें पता चला कि हमारा फाइनल यहां शिफ्ट हुआ है, टीम में खुशी की लहर दौड़ गई। सबने कहा — अब कप नहीं छोड़ेंगे। यह हमारा घर है और यहां से हम जीतेंगे।”

टूर्नामेंट की शुरुआत भारत के लिए कठिन रही। टीम ने लीग चरण में लगातार तीन हार झेली। लेकिन मुंबई चरण शुरू होते ही किस्मत पलट गई। न्यूजीलैंड पर जीत के साथ भारत ने वापसी की और डीवाई पाटिल में खेले गए सभी मुकाबले जीते। सेमीफाइनल में भारत ने मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराया और फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को मात दी।

फाइनल में हरमनप्रीत ने रणनीति सरल रखी। उन्होंने कहा, “हमने बड़ा स्कोर सोचकर दबाव नहीं लिया। बस एक-एक रन बनाते गए। लक्ष्य था 300 का। हम 298 पर रुके, लेकिन आत्मविश्वास बना रहा।”

स्मृति मंधाना और शैफाली वर्मा ने तेज शुरुआत दी। बाद में हरमनप्रीत ने जिम्मेदारी संभाली और साझेदारियाँ बनाईं। मैदान में हर शॉट पर दर्शक झूम उठे। “भीड़ का जोश हमें ताकत दे रहा था,” हरमनप्रीत ने कहा।

गेंदबाज़ी में भारत ने टीमवर्क दिखाया। दीप्ति शर्मा और रेणुका सिंह ने शुरुआती झटके दिए। लेकिन असली मोड़ तब आया जब हरमनप्रीत ने शैफाली वर्मा को गेंद सौंपी। शैफाली ने कप्तान के भरोसे को सही साबित किया। उसने पहले सून लूस को कैच एंड बोल्ड किया, फिर अगले ओवर की पहली गेंद पर मरीज़ान कैप को आउट किया।

हरमनप्रीत ने बताया, “यह मेरा गट फीलिंग था। शैफाली ने पहले कहा था कि अगर ज़रूरत पड़े तो दस ओवर भी डाल सकती है। उसका आत्मविश्वास देखकर लगा कि उसे मौका देना चाहिए। और वही निर्णायक साबित हुआ।”

कोच अमोल मजूमदार ने भी टीम को हार से उबरने में अहम भूमिका निभाई। इंग्लैंड से चार रन की हार के बाद उन्होंने टीम से कहा, “अब दोहराई गलती नहीं चलेगी। मजबूत मानसिकता से खेलो।” उसी रात टीम ने निश्चय किया कि अब हर मैच जीतना है।

हरमनप्रीत ने कहा, “1983 में पुरुष टीम की जीत ने क्रिकेट बदल दिया था। अब हमारी जीत भी वैसा ही बदलाव लाएगी। लोग अब भारतीय महिला टीम को विश्व चैंपियन के रूप में देखेंगे।”

डीवाई पाटिल स्टेडियम की रोशनी में ट्रॉफी चमक रही थी। हरमनप्रीत और मंधाना एक-दूसरे को गले लगाकर मुस्करा रही थीं। भारत ने आखिरकार वह कर दिखाया, जिसका इंतज़ार हर क्रिकेट प्रेमी कर रहा था।


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