हैदराबाद – हैदराबाद में शुक्रवार को कांग्रेस नेता और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मंत्री पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की कैबिनेट में उन्हें शामिल किया गया। राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
अजहरुद्दीन के शामिल होने से तेलंगाना मंत्रिमंडल की संख्या अब 16 हो गई है। राज्य विधानसभा के अनुसार, कैबिनेट में अधिकतम 18 मंत्री हो सकते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अजहरुद्दीन की एंट्री कांग्रेस की रणनीतिक चाल है। पार्टी आगामी जुबली हिल्स उपचुनाव में कड़ी टक्कर झेल रही है, जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
जुबली हिल्स की सीट बीआरएस विधायक मगोनी गोपीनाथ के निधन के बाद खाली हुई थी। कांग्रेस को उम्मीद है कि अजहरुद्दीन की लोकप्रियता पार्टी को उपचुनाव में फायदा देगी।
हालांकि, अजहरुद्दीन ने इन अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा, “मैं अपनी पार्टी के नेतृत्व, जनता और समर्थकों का धन्यवाद करता हूं। मंत्री बनना और उपचुनाव, दोनों अलग-अलग बातें हैं। इनका कोई संबंध नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, मैं उसे ईमानदारी से निभाऊंगा और वंचितों के विकास के लिए काम करूंगा। मुझे देशभक्ति का प्रमाणपत्र किसी से नहीं चाहिए।”
दूसरी ओर, बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने इस नियुक्ति को “राजनीतिक तुष्टिकरण” बताया। बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस ने यह फैसला सिर्फ अल्पसंख्यक वोटों को साधने के लिए लिया है।
तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कैबिनेट विस्तार को उपचुनाव से जोड़कर किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने अजहरुद्दीन को मंत्री बनाकर जुबली हिल्स में मुस्लिम वोटों को आकर्षित करने की कोशिश की है। यह कदम शासन के बजाय चुनावी गणित पर आधारित है।”
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस नियुक्ति को बड़े सामाजिक संतुलन की पहल के रूप में देखती है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का उद्देश्य सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व देना है।
अजहरुद्दीन, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को कई यादगार जीत दिलाई, अब राजनीति में नई पारी शुरू कर चुके हैं। वे इससे पहले मछलीपट्टनम से सांसद रह चुके हैं और कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नेता हैं।
तेलंगाना की सियासत में यह कदम कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। पार्टी अब मंत्रीमंडल में दो और सीटें भरने की तैयारी कर रही है। इन पदों पर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएंगे।
कुल मिलाकर, अजहरुद्दीन की एंट्री ने तेलंगाना की राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है — कांग्रेस इसे नया संतुलन मान रही है, जबकि बीजेपी इसे चुनावी सौदा बता रही है।