वॉशिंगटन डीसी – ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को एक नया विज्ञापन जारी कर H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर विवाद फिर भड़का दिया। अमेरिकी श्रम विभाग ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर कंपनियों पर आरोप लगाया कि वे युवा अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कामगारों को रख रही हैं। विभाग ने इस विज्ञापन में सीधे तौर पर भारत को इस वीजा प्रणाली का सबसे बड़ा लाभार्थी बताया।
विभाग ने एक्स पर लिखा, “युवा अमेरिकियों से उनका अमेरिकी सपना छीना गया है, क्योंकि कंपनियों ने H-1B वीजा का दुरुपयोग कर उनकी नौकरियां विदेशी कर्मियों को दे दीं।” आगे लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप और श्रम सचिव लॉरी चैवेज-डेरेमर के नेतृत्व में हम ऐसी कंपनियों को जवाबदेह ठहरा रहे हैं और अमेरिकी लोगों के लिए उनका सपना वापस ला रहे हैं।”
यह अभियान श्रम विभाग की नई पहल “प्रोजेक्ट फायरवॉल” से जुड़ा है, जिसे सितंबर 2025 में शुरू किया गया। यह कार्यक्रम H-1B वीजा के अनुपालन की जांच करता है और उन कंपनियों पर नजर रखता है जो सस्ते विदेशी पेशेवरों को रखकर अमेरिकी युवाओं की नौकरियां छीनती हैं।
विज्ञापन में दिखाए गए 51-सेकंड के वीडियो में 1950 के दशक के “अमेरिकन ड्रीम” के दृश्य — खुशहाल परिवार, फैक्ट्रियां और उपनगर — को मौजूदा आंकड़ों के साथ जोड़ा गया है। वीडियो में दावा किया गया कि 72 प्रतिशत H-1B वीजा भारत के नागरिकों को मिलते हैं, और राष्ट्रपति ट्रंप को अमेरिकी युवाओं के रोजगार को प्राथमिकता देने का श्रेय दिया गया।
वीडियो की आवाज कहती है, “पीढ़ियों से अमेरिकियों को सिखाया गया कि मेहनत से सपना पूरा होता है। लेकिन आज वह सपना उनसे छीना गया है।” फिर संदेश आता है, “राजनेताओं और नौकरशाहों ने कंपनियों को वीजा के दुरुपयोग की छूट दी, जिससे विदेशी कामगारों ने उनकी जगह ले ली। अब राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी युवाओं के लिए नए अवसर ला रहे हैं।”
वीडियो का अंत इस टैगलाइन से होता है — “प्रोजेक्ट फायरवॉल के ज़रिए हम उन कंपनियों पर कार्रवाई कर रहे हैं जो H-1B का दुरुपयोग करती हैं, ताकि अमेरिकी युवाओं को प्राथमिकता दी जा सके और उनका सपना लौटाया जा सके।”
इस अभियान से ट्रंप प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल में फिर से “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा को तेज़ किया है। अब ध्यान घरेलू भर्ती, वीजा जांच और रोजगार में आत्मनिर्भरता पर है।
अधिकारियों ने कहा कि प्रोजेक्ट फायरवॉल के तहत श्रम विभाग व्यापक ऑडिट करेगा। इसका उद्देश्य उन कंपनियों की पहचान करना है जो वीजा का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने या वेतन कम करने के लिए करती हैं।
इस अभियान ने अमेरिका के राजनीतिक माहौल में फिर से प्रवासी वीजा नीति और भारत की भूमिका को केंद्र में ला दिया है। ट्रंप प्रशासन ने यह संकेत दिया है कि उसकी प्राथमिकता स्पष्ट है — “अमेरिकी नौकरियां पहले, विदेशी वीजा बाद में।”