मुंबई में ‘बकाया भुगतान’ विवाद से जुड़ा बंधक कांड, पुलिस मुठभेड़ में रोहित आर्या ढेर
पवई, मुंबई – गुरुवार को पवई के आरए स्टूडियो में एक फिल्म ऑडिशन के नाम पर हुए बंधक कांड ने पूरे शहर को हिला दिया। रोहित आर्या नाम के व्यक्ति ने 17 बच्चों को बंधक बना लिया। वह एयरगन और एक ज्वलनशील स्प्रे से लैस था। तीन घंटे से अधिक चली इस घटना का अंत पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत के साथ हुआ। सभी बच्चे सुरक्षित बचा लिए गए।
रोहित आर्या ने स्टूडियो में खुद का वीडियो बनाकर कहा कि उसकी कोई हिंसक मंशा नहीं है। उसने दावा किया कि महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने उसके ₹2 करोड़ बकाया का भुगतान नहीं किया। उसने कहा, “मैं आतंकवादी नहीं हूं, मेरे मांग नैतिक और कानूनी हैं।”
घटना के समय आर्या “लेट्स चेंज – स्वच्छता मॉनिटर” प्रोजेक्ट के नाम पर अपने बकाया की मांग कर रहा था। यह कार्यक्रम 2022 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर के कार्यकाल में ‘माझी शाळा, सुंदर शाळा’ योजना के तहत शुरू हुआ था। आर्या ने इस पहल में फिल्में और डॉक्युमेंट्री बनाई थीं, जो स्कूलों में स्वच्छता जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित थीं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 2024 में आर्या कई बार केसरकर के घर और आज़ाद मैदान के बाहर धरने पर बैठा था। वह लगातार सोशल मीडिया पर लिख रहा था कि सरकार ने उसके कार्य का भुगतान रोका है। उसकी पत्नी अंजलि आर्या ने भी कहा कि उनका परिवार कई महीनों से भुगतान का इंतज़ार कर रहा था।
हालांकि, महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने आर्या के दावों को खारिज किया। विभाग ने बयान जारी कर कहा कि आर्या ने अपने बकाया के समर्थन में कोई दस्तावेज नहीं दिया। इसके बजाय उसने ‘स्वच्छता मॉनिटर 2024-25’ अभियान में कई स्कूलों से पंजीकरण शुल्क लिया, जो नियमों के खिलाफ था।
विभाग ने अगस्त 2024 में उसे निर्देश दिया था कि स्कूलों से वसूला गया पैसा सरकारी खाते में जमा करे और सही बजट दस्तावेज पेश करे। परंतु आर्या ने न तो पैसा जमा किया, न ही कोई बजट रिपोर्ट सौंपी। इसलिए विभाग ने उसके प्रोजेक्ट पर आगे की कार्रवाई रोक दी।
विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक, 2022 और 2023 में आर्या की कंपनी अप्सरा मीडिया एंटरटेनमेंट नेटवर्क को दो बार स्वीकृति मिली और ₹9.9 लाख का भुगतान हुआ। 2023-24 में उसने ₹2 करोड़ के बजट की मांग की, लेकिन खर्च का कोई प्रमाण नहीं दिया। तकनीकी खामियों के कारण योजना फिर लागू नहीं हो सकी।
पूर्व मंत्री दीपक केसरकर ने स्वीकार किया कि उन्होंने मानवीय आधार पर आर्या को अपने निजी खाते से कुछ रकम दी थी। उन्होंने कहा, “सरकार बिना बिलों के भुगतान नहीं कर सकती। आर्या दस्तावेज़ नहीं दे रहा था और अफसरों की नहीं सुन रहा था।”
केसरकर ने जोड़ा कि आर्या को विभाग के साथ संवाद करना चाहिए था, बच्चों को खतरे में नहीं डालना चाहिए था।
पुलिस ने देर शाम तक ऑपरेशन चलाया। आरए स्टूडियो के अंदर से बच्चों को सुरक्षित निकालने के बाद आर्या ने धमकी दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे गोली मार दी।
घटना के बाद पवई क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई। पुलिस ने बताया कि जांच जारी है और आर्या के वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
यह दर्दनाक घटना एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं और भुगतान प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की जरूरत पर सवाल खड़ा करती है।
