सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा

0
SC

नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली गीताांजलि अंगमो की संशोधित याचिका पर केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख 24 नवंबर तय की।

अंगमो ने अपने पति की रिहाई के लिए याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि लद्दाख प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) का दुरुपयोग किया। उनका आरोप है कि सरकार ने एक शांतिपूर्ण आंदोलन की आवाज़ दबाने के लिए यह कदम उठाया।

अक्टूबर 16 को अदालत ने अंगमो को अपनी याचिका संशोधित करने की अनुमति दी थी। उन्होंने लद्दाख प्रशासन द्वारा दी गई गिरफ्तारी की वजहों को चुनौती देने की इच्छा जताई थी। अंगमो ने कहा कि यह गिरफ्तारी “गैरकानूनी” है और एक सम्मानित सामाजिक सुधारक को चुप कराने की कोशिश है।

लद्दाख में प्रदर्शन और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
सितंबर के आखिरी सप्ताह में लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए। आंदोलन शुरू में शांतिपूर्ण था, लेकिन 24 सितंबर को हिंसा भड़क गई। इसमें चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।

दो दिन बाद, 26 सितंबर को पुलिस ने वांगचुक को लेह से गिरफ्तार किया और उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया। वे अभी वहीं बंद हैं।

लद्दाख प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया। प्रशासन ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट ने सभी सबूतों की समीक्षा के बाद गिरफ्तारी का आदेश जारी किया। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ गतिविधियों में शामिल थे।

प्रशासन ने गैरकानूनी गिरफ्तारी या दुर्व्यवहार के सभी आरोपों को खारिज किया। उसने कहा कि वांगचुक को गिरफ्तारी के कारणों और अपील के अधिकार की जानकारी दी गई थी।

जांच और सुनवाई जारी
पिछले हफ्ते लद्दाख प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय सलाहकार बोर्ड ने जोधपुर जेल में वांगचुक से मुलाकात की। करीब तीन घंटे चली सुनवाई में गीताांजलि अंगमो ने खुद बोर्ड के अध्यक्ष और दो सदस्यों के सामने अपना पक्ष रखा।

वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद लद्दाख में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। क्षेत्र में राज्य के दर्जे और संवैधानिक अधिकारों की मांग लगातार उठ रही है।

सोनम वांगचुक, जो हिमालयी पारिस्थितिकी और सतत विकास के लिए काम करने वाले प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैं, आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने। उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ देशभर के पर्यावरण समूहों ने विरोध जताया।

अब नजर सुप्रीम कोर्ट की 24 नवंबर की सुनवाई पर है। इस बीच, गीताांजलि अंगमो अपने पति की रिहाई की कानूनी लड़ाई जारी रखे हुए हैं — एक ऐसी लड़ाई जो लद्दाख के अधिकारों की आवाज भी बन चुकी है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News