दक्षिण कोरिया में ट्रंप-शी की ऐतिहासिक मुलाकात, एशिया-प्रशांत व्यापार तनाव पर निगाहें

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ग्योंगजू (दक्षिण कोरिया) – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को दक्षिण कोरिया पहुंचे। वे यहां अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। यह बैठक एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) सम्मेलन के इतर होगी। दोनों नेताओं की यह छह साल में पहली आमने-सामने की बातचीत होगी। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रहे व्यापार युद्ध के बीच यह मुलाकात अहम मानी जा रही है।

दक्षिण कोरिया इस बार APEC सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। ग्योंगजू में शुरू हुई बैठकें शनिवार तक चलेंगी। इस दौरान सदस्य देश सप्लाई चेन मजबूत करने और फ्री ट्रेड एरिया ऑफ द एशिया-पैसिफिक (FTAAP) को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। APEC में 21 अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं जो वैश्विक GDP का आधा हिस्सा रखती हैं और करीब 2.7 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

ट्रंप का यह उनके दूसरे कार्यकाल का पहला एशियाई दौरा है। उन्होंने पहले मलेशिया और जापान का दौरा किया था। जापान में उन्होंने नए प्रधानमंत्री साने ताकाइची से मुलाकात की और कंबोडिया-थाईलैंड शांति समझौते पर हस्ताक्षर करवाए। दक्षिण कोरिया उनका तीसरा पड़ाव है।

ग्योंगजू पहुंचने से पहले ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि हमारी राष्ट्रपति शी से शानदार मुलाकात होगी। कई समस्याओं का समाधान निकल सकता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ताइवान मुद्दे पर चर्चा जरूरी नहीं होगी। “शायद वह पूछें, पर ताइवान तो ताइवान है,” ट्रंप ने कहा।

ट्रंप गुरुवार को शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता व्यापार तनाव, तकनीकी निवेश, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम होगी।

ट्रंप बुधवार को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग से भी मिलेंगे। दोनों देश आपसी व्यापार संतुलन और रक्षा सहयोग को लेकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा, ट्रंप सियोल में आयोजित सीईओ समिट को भी संबोधित करेंगे, जहां वे अमेरिकी निवेश और नए व्यापार अवसरों पर बोलेंगे।

हालांकि ट्रंप APEC नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले ही रवाना होंगे, लेकिन उनके दौरे को कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। दक्षिण कोरिया ने कहा है कि सम्मेलन का फोकस सप्लाई चेन सुधार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित निवेश पर रहेगा।

APEC की स्थापना 1989 में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए हुई थी। अमेरिका, चीन, जापान और रूस जैसे देश इसके प्रमुख सदस्य हैं। हर साल सदस्य देशों के शीर्ष नेता इस मंच पर मिलते हैं और वैश्विक व्यापार नीति पर दिशा तय करते हैं।

ग्योंगजू में इस बार सबकी नजरें ट्रंप-शी मुलाकात पर टिकी हैं। क्या दोनों नेता व्यापार युद्ध को नरम करेंगे या प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी — इसका संकेत आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल, दुनिया उम्मीद कर रही है कि यह मुलाकात तनाव कम करने का रास्ता खोलेगी।


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