दिल्ली में क्लाउड सीडिंग सफल, अब मेरठ की उड़ान — शाम तक बारिश की उम्मीद

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नई दिल्ली: दिल्ली में सोमवार को कृत्रिम बारिश की दिशा में बड़ा कदम देखा गया। आईआईटी कानपुर की टीम ने क्लाउड सीडिंग का पहला ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके तुरंत बाद विमान मेरठ के लिए रवाना हो गया। अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि शाम सात बजे से पहले राजधानी के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

दीवाली के बाद दिल्ली और एनसीआर की हवा लगातार जहरीली बनी हुई है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण भी जारी है। इसके बावजूद हवा में सुधार नहीं दिखा। इस पृष्ठभूमि में कृत्रिम बारिश को अस्थायी राहत के उपाय के रूप में देखा जा रहा है।

क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया में विमान से आयोडाइड क्रिस्टल और नमक जैसे कण छोड़े जाते हैं। ये कण नमी वाले बादलों में घुलकर छोटे जलकणों को आपस में मिलाते हैं, जिससे बड़े कण बनते हैं और बारिश होती है। यह तकनीक कई देशों में प्रदूषण घटाने और सूखे से राहत देने के लिए अपनाई गई है।

मुख्य ट्रायल से पहले दिल्ली सरकार ने बुराड़ी इलाके में एक परीक्षण किया था। हालांकि, उस समय हवा में नमी 20 प्रतिशत से भी कम थी। इस वजह से बारिश नहीं हो सकी। वैज्ञानिकों के अनुसार, सफल सीडिंग के लिए कम से कम 50 प्रतिशत नमी जरूरी होती है। सोमवार को मौसम में नमी बढ़ी, जिससे इस बार ट्रायल संभव हुआ।

दिल्ली सरकार ने 25 सितंबर को आईआईटी कानपुर के साथ पांच ट्रायल के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इस साझेदारी का लक्ष्य प्रदूषण के मौसमी चरम पर राहत पहुंचाना है।

वायु विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहली उड़ान से मिले नतीजों की समीक्षा जारी है। अगर मौसम अनुकूल रहा, तो आज देर शाम दूसरा ट्रायल भी किया जा सकता है। “नमी और हवा की दिशा फिलहाल अनुकूल है,” एक अधिकारी ने कहा। “हम अगले कुछ घंटों में फैसला लेंगे।”

दोपहर बाद राजधानी के कुछ हिस्सों में हल्की फुहारें दर्ज की गईं। इससे उम्मीद जगी कि सीडिंग का असर दिखना शुरू हो गया है। कई इलाकों में दृश्यता थोड़ी बेहतर हुई और लोगों ने राहत महसूस की।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि कृत्रिम बारिश केवल अस्थायी राहत दे सकती है। उन्होंने स्थायी समाधान के लिए वाहनों से निकलने वाले धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने पर सख्त नियंत्रण की जरूरत बताई।

अगर मौसम सहयोग करता रहा, तो दिल्ली रात तक दूसरी बीजाई की कोशिश देख सकती है। वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर आसमान पर नजर रखे हुए हैं। राजधानी के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह प्रयोग उन्हें कुछ समय के लिए ही सही, लेकिन सांस लेने में राहत दे सके।


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