नई दिल्ली — राजधानी दिल्ली में मंगलवार को कृत्रिम बारिश का प्रयोग हो सकता है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मौसम ने साथ दिया तो क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रयोग कानपुर से उड़ान भरने वाले विमान के ज़रिए होगा। सिरसा ने बताया कि कानपुर में अभी दृश्यता 2,000 मीटर है। जैसे ही यह 5,000 मीटर तक पहुंचेगी, विमान क्लाउड सीडिंग के लिए रवाना होगा।
दिल्ली में हवा की गुणवत्ता लगातार “बहुत खराब” श्रेणी में बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को स्थिति नहीं सुधरी। मंगलवार सुबह आनंद विहार का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 321 दर्ज किया गया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछले हफ्ते कहा था कि यह कदम ज़रूरी है। उन्होंने इसे दिल्ली की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए “जरूरत का कदम” बताया।
क्या है क्लाउड सीडिंग और कैसे होती है कृत्रिम बारिश?
क्लाउड सीडिंग यानी बादलों में ऐसे कण छोड़ना जो बारिश बनने की प्रक्रिया को तेज़ करें। वैज्ञानिक आमतौर पर सिल्वर आयोडाइड या नमक आधारित कण बादलों में मिलाते हैं। इससे छोटे-छोटे जलकण आपस में मिलकर बड़े बूंदों का रूप लेते हैं और बारिश होती है।
दिल्ली सरकार ने पिछले हफ्ते बुराड़ी के ऊपर परीक्षण उड़ान की थी। उस दौरान विमान से सीमित मात्रा में सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड छोड़ा गया। लेकिन उस दिन वातावरण में नमी 20 प्रतिशत से भी कम थी। जबकि क्लाउड सीडिंग के लिए कम से कम 50 प्रतिशत नमी की ज़रूरत होती है। इसलिए प्रयोग सफल नहीं हो पाया।
अब सरकार पूरी तैयारी के साथ मंगलवार को दोबारा प्रयास करने जा रही है। सिरसा ने कहा, “जैसे ही कानपुर में मौसम साफ होगा, हमारा विमान वहाँ से उड़ेगा। अगर सब कुछ अनुकूल रहा, तो आज दिल्ली में क्लाउड सीडिंग होगी और बारिश भी संभव है।”
क्यों हो रही है कृत्रिम बारिश की कोशिश?
दिल्ली हर साल सर्दियों में प्रदूषण से जूझती है। खेतों में पराली जलने, वाहन उत्सर्जन और ठंडी हवाओं के कारण स्मॉग का स्तर खतरनाक हो जाता है। इस बार भी हवा जहरीली हो चुकी है। ऐसे में कृत्रिम बारिश से प्रदूषण कणों को नीचे गिराकर हवा को साफ करने की कोशिश की जा रही है।
आईआईटी कानपुर और दिल्ली सरकार ने 25 सितंबर को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत पाँच बार क्लाउड सीडिंग का प्रयोग किया जाएगा।
वैज्ञानिकों का मानना है कि सफल होने पर यह तकनीक भविष्य में दिल्ली समेत दूसरे महानगरों के लिए भी राहत साबित हो सकती है। वहीं पर्यावरण विभाग का कहना है कि सरकार मौसम पर लगातार नज़र रख रही है और जैसे ही स्थितियाँ अनुकूल होंगी, प्रयोग शुरू किया जाएगा।
अगर आज सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो दिल्ली के आसमान से कृत्रिम बारिश की पहली बूंदें गिर सकती हैं — प्रदूषण से राहत की उम्मीद के साथ।