हरियाणा के हिसार से सर्वोच्च न्यायालय तक: जस्टिस सूर्यकांत बनेंगे देश के अगले मुख्य न्यायाधीश
नई दिल्ली: भारत के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत पदभार संभालने जा रहे हैं। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई ने उनका नाम उत्तराधिकारी के रूप में सरकार को सिफारिश किया है। सरकार के औपचारिक अधिसूचना जारी करने के बाद जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर को पदभार ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।
मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत हर दृष्टि से इस जिम्मेदारी के लिए सक्षम हैं। उन्होंने बताया, “हम दोनों ऐसे वर्ग से आते हैं जिसने जीवन के हर चरण में संघर्ष देखा है। इसलिए मुझे विश्वास है कि वह समाज के पीड़ितों और वंचितों की पीड़ा को गहराई से समझेंगे।”
हिसार से सर्वोच्च न्यायालय तक की यात्रा
10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत ने सरकारी स्नातकोत्तर कॉलेज, हिसार से पढ़ाई की और 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से एलएलबी की डिग्री हासिल की। उन्होंने करियर की शुरुआत हिसार जिला अदालत से की और 1985 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। वहाँ उन्होंने संवैधानिक, सेवा और सिविल मामलों में विशेषज्ञता हासिल की।
2000 में वह मात्र 38 वर्ष की उम्र में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने। अगले वर्ष उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला। उन्होंने कई विश्वविद्यालयों, बोर्डों और बैंकों का प्रतिनिधित्व किया।
न्यायिक सफर और उपलब्धियां
जनवरी 2004 में वह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने और 14 वर्षों तक सेवा दी। उन्होंने अपने निर्णयों में सामाजिक संवेदना और संवैधानिक समझ का संतुलन बनाए रखा। अक्टूबर 2018 में वह हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और मई 2019 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत कई संविधान पीठों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने 2023 में अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले में भी भाग लिया। अब तक वे 1,000 से अधिक मामलों में निर्णय दे चुके हैं, जिनमें संवैधानिक कानून, मानवाधिकार और प्रशासनिक न्याय शामिल हैं।
वर्तमान में वह सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन हैं और रांची स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ के विज़िटर के रूप में कार्यरत हैं। पहले वे दो कार्यकाल तक राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के सदस्य रह चुके हैं और इंडियन लॉ इंस्टिट्यूट से भी जुड़े हैं।
हरियाणा के लिए ऐतिहासिक क्षण
जस्टिस सूर्यकांत देश के पहले ऐसे मुख्य न्यायाधीश होंगे जो हरियाणा से हैं। उनका कार्यभार संभालना न केवल राज्य के लिए गौरव का विषय है बल्कि न्यायपालिका में वरिष्ठता आधारित नियुक्ति प्रणाली की निरंतरता को भी दर्शाता है।
उनकी यह यात्रा संघर्ष, अनुशासन और सामाजिक संवेदनशीलता की मिसाल है—हिसार की अदालत से भारत के सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी।
