“भारत की बदनामी हो रही है”: राज्यों पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, पूछा— आदेश का पालन क्यों नहीं?
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकारों को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि राज्यों ने अगस्त में दिए उसके आदेश पर अब तक हलफनामा दाखिल नहीं किया है। आदेश में अदालत ने देशभर में आवारा कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी कराने और फिर उसी इलाके में छोड़ने को कहा था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने नाराजगी जताई कि आदेश के बाद भी कुत्तों के हमले बढ़े हैं। पिछले महीने महाराष्ट्र के पुणे में एक बच्चे पर हमला हुआ। कुछ दिन बाद भंडारा जिले में 20 कुत्तों के झुंड ने एक बच्ची को नोच लिया। इसी बीच केरल के कन्नूर में एक व्यक्ति पर हमला हुआ, जो आवारा कुत्तों पर नुक्कड़ नाटक कर रहा था। पिछले 48 घंटे में उत्तर प्रदेश के लखनऊ और तेलंगाना के वारंगल से भी ऐसे मामले आए।
मुख्य न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी की— “राज्य सरकारों से अब तक कोई जवाब नहीं आया। आपकी लापरवाही से देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब हो रही है।” अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा।
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की विशेष पीठ ने कहा, “क्या आप लोग अखबार नहीं पढ़ते? 22 अगस्त को पारित आदेश हर जगह छपा था। अब सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को अदालत में पेश होकर देरी की वजह बतानी होगी।”
पीठ ने बताया कि अब तक केवल बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली नगर निगम ने जवाब दाखिल किया है। हालांकि, अदालत की छुट्टियों के कारण वे रेकॉर्ड पर नहीं चढ़ पाए। दिल्ली सरकार की ओर से हलफनामा न आने पर अदालत ने नाराजगी जताई।
इस बीच राजस्थान ने आदेश पर अमल शुरू किया है। स्वायत्त शासन विभाग ने सभी नगर निगमों, परिषदों और नगरपालिकाओं को सख्त निर्देश जारी किए। प्रत्येक वार्ड में फीडिंग पॉइंट तय करने और निवासी कल्याण संघों व पशु कल्याण संगठनों के साथ समन्वय का आदेश दिया गया। कुत्तों की नसबंदी, इलाज, टैगिंग और उसी इलाके में पुनः छोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
नोएडा प्रशासन ने भी सर्वे शुरू किया है ताकि शहरभर में कुत्तों की संख्या का पता चल सके। आरडब्ल्यूए और एनजीओ को फोटो सहित रिपोर्ट देने को कहा गया है, जिसमें नसबंद, आक्रामक या रेबीज़ संदिग्ध कुत्तों की जानकारी शामिल हो।
दक्षिण भारत में ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने सितंबर तक अपने अभियान को तेज किया। निगम ने 15 सितंबर तक 46,122 कुत्तों को रेबीज़ का टीका लगाया और 12,000 से अधिक को माइक्रोचिप लगाकर उनका भू-मानचित्र तैयार किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को अपने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए कहा था कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद ही कुत्तों को उनके इलाके में छोड़ा जाए। रेबीज़ संक्रमित या आक्रामक कुत्तों को छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
अदालत ने कहा कि कुत्तों की बढ़ती हिंसा पर राज्य लापरवाह नहीं रह सकते। आदेश का उद्देश्य कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रित करना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अदालत ने अगली सुनवाई में सभी राज्यों से ठोस प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
