पूर्वी तट पर चक्रवात मोंथा का असर, तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट
बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व हिस्से में बन रहा गहरा दबाव अब चक्रवात ‘मोंथा’ में बदल गया है। यह साल का पहला बड़ा चक्रवात है जो भारतीय तट से टकराने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि तूफान तेजी से ताकत पकड़ रहा है और मंगलवार तक यह गंभीर चक्रवाती तूफान बन सकता है। इसके बाद यह आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट के पास जमीन से टकराएगा।
इस संभावित खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा सरकारों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। दोनों राज्यों ने स्कूलों को बंद करने, राहत दलों को तैनात करने और तटीय इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि ओडिशा से लेकर तमिलनाडु तक भारी बारिश, तेज हवाएं और ऊंची लहरें देखने को मिलेंगी।
चक्रवात की दिशा और संभावित असर
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात मोंथा 28 अक्टूबर की शाम तक मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच, काकीनाडा के पास से गुजरेगा। इस दौरान तटीय जिलों में भारी वर्षा, तेज हवाएं और समुद्री लहरों में उफान देखने की संभावना है। आंध्र प्रदेश के कई तटीय इलाकों में चेतावनी जारी कर दी गई है।
स्कूलों की छुट्टियाँ और प्रशासनिक तैयारी
तूफान की चेतावनी के बाद स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने के आदेश जारी हुए हैं।
आंध्र प्रदेश में स्थिति:
काकीनाडा जिले में प्रशासन ने होप आइलैंड के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना शुरू कर दिया है। जिले में 27 से 31 अक्टूबर तक सभी स्कूल बंद रहेंगे।
पश्चिम गोदावरी और एलुरु जिलों में 27 और 28 अक्टूबर को दो दिन की छुट्टी घोषित की गई है।
पूर्वी गोदावरी, अन्नमय्या और कडप्पा में भी यही आदेश लागू रहेगा।
एनटीआर, बापटला, कृष्णा और गुंटूर जिलों में 27 से 29 अक्टूबर तक स्कूल बंद रहेंगे।
कोनसीमा जिले में बारिश की स्थिति देखकर प्रशासन निर्णय लेगा।
ओडिशा में हालात:
गजपति जिले की कलेक्टर मधुमिता ने सभी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों को 30 अक्टूबर तक बंद रखने का आदेश दिया है। दक्षिणी ओडिशा के अन्य जिलों में भी इसी तरह की रोक की संभावना है।
ओडिशा में समीक्षा बैठक और रेड जोन अलर्ट
ओडिशा के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने रविवार को उच्चस्तरीय बैठक में तैयारी की समीक्षा की। उन्होंने आठ जिलों—मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, गंजाम, गजपति, कंधमाल, कालाहांडी और नबरंगपुर—को रेड जोन में रखा। इन जिलों में भारी नुकसान की आशंका जताई गई है।
सरकार की अपील और बचाव की रणनीति
दोनों राज्य अब पूरी सतर्कता में हैं। प्रशासन का लक्ष्य जनहानि और संपत्ति नुकसान को न्यूनतम रखना है। टीमें राहत सामग्री और निकासी कार्य में जुटी हैं।
अधिकारियों ने लोगों से घरों में रहने, मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और प्रशासन से सहयोग करने की अपील की है। तटीय इलाकों में मछुआरों को समंदर में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
जैसे-जैसे चक्रवात मोंथा करीब आ रहा है, पूर्वी भारत के तटीय राज्य एक बड़ी परीक्षा के लिए तैयार हो रहे हैं।
