माइंस विभाग ने छह जनवरी तक रिकॉर्ड 4234 करोड़ का राजस्व अर्जित किया
जयपुर, 09 जनवरी (हि.स.)। राज्य के माइंस विभाग ने राजस्व संग्रहण में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। विभाग ने 6 जनवरी तक 4234 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रहित किया है। यह पूर्व के दो सालों की इसी अवधि से करीब करीब एक हजार करोड़ रुपये अधिक है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया है कि विभाग की उच्चस्तरीय नियमित मॉनिटरिंग का ही परिणाम है कि प्रदेश में माइंस विभाग द्वारा राजस्व संग्रहण का नया रिकार्ड बनाया जा रहा है। आरएसएमईटी, एनएमईटी, डीएमएफटी की राशि को भी जोड़ने के बाद यह राशि बढ़कर 5170 करोड़ रुपये से भी अधिक हो जाती है। उन्होंने बताया कि योजनाबद्ध प्रयासों, लगातार समीक्षा, छीजत पर प्रभावी रोक के निर्देश, अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण पर सख्त कार्रवाई के निर्देशों का परिणाम रहा है कि प्रदेश में माइंस विभाग के राजस्व संग्रहण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कोविड पूर्व के वर्ष 2019-20 में इसी अवधि में 3141 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था वहीं कोविड के बावजूद सकारात्मक प्रयासों से वर्ष 2020-21 में इसी अवधि में 3244 करोड़ का राजस्व संग्रहित हुआ। उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इस वित्तीय वर्ष में 6 जनवरी तक 4234 करोड़ 16 लाख रुपये का राजस्व जमा हुआ है जो गए साल की इसी अवधि से 30 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने बताया कि सामान्य प्रक्रिया वित्तीय वर्ष के अंत में लक्ष्यों अर्जित करने की रहती है पर विभाग ने आरंभ से ही प्रतिदिन के राजस्व संग्रहण के आधार पर मोनेटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जिसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।
निदेशक माइंस केबी पण्ड्या ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार राज्य में खनन गतिविधियों से 6 से 8 लाख लोगों को प्रत्यक्ष व 22 से 25 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद विभाग द्वारा राजस्व बढ़ोतरी के सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं।
