देश भर में फैली 17.78 लाख एकड़ सैन्य भूमि के सर्वेक्षण में लगे तीन साल
– जीपीएस, ड्रोन इमेजरी और सेटेलाइट इमेजरी जैसी तकनीक से हुआ सैन्य भूमि का सर्वेक्षण
– देश के 4,900 दुर्गम इलाकों की सैन्य भूमि के सर्वेक्षण में पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल हुआ
नई दिल्ली, 09 जनवरी (हि.स.)। आजादी के बाद पहली बार रक्षा मंत्रालय ने देश भर में फैली कुल 17.78 लाख एकड़ सैन्य भूमि का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। इसमें सैन्य छावनियों के अंदर की लगभग 1.61 लाख एकड़ और छावनियों के बाहर की 16.17 लाख एकड़ जमीन का सर्वेक्षण करने तीन वर्ष लगे हैं। विश्वसनीय, मजबूत और समयबद्ध सर्वेक्षण प्रक्रिया को और तेज करने के लिए जीपीएस, ड्रोन इमेजरी और सेटेलाइट इमेजरी जैसी आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों का उपयोग किया गया।
रक्षा संपदा कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार रक्षा मंत्रालय के पास देश भर में लगभग 17.99 लाख एकड़ भूमि है, जिसमें से लगभग 1.61 लाख एकड़ जमीन 62 सैन्य छावनियों के भीतर स्थित है। छावनी के बाहर कई इलाकों में करीब 16.38 लाख एकड़ जमीन फैली हुई है। 16.38 लाख एकड़ भूमि में से लगभग 18 हजार एकड़ जमीन या तो राज्य सरकारों ने किराए पर ली गई है या अन्य सरकारी विभागों को हस्तांतरण किये जाने का प्रस्ताव है। रक्षा भूमि की सुरक्षा, अतिक्रमण की रोकथाम, रक्षा भूमि का स्पष्ट सीमांकन करने के लिए सीमा सर्वेक्षण और सीमाओं का निर्धारण करने के लिए रक्षा मंत्रालय के रक्षा संपदा महानिदेशालय ने अक्टूबर, 2018 से रक्षा भूमि का सर्वेक्षण शुरू किया। तीन वर्षों के भीतर कुल 17.78 लाख एकड़ जमीन का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक रक्षा भूमि के इस सर्वेक्षण में विभिन्न राज्य सरकारों के राजस्व अधिकारियों का सहयोग लिया गया है। देश भर में लगभग 4,900 इलाकों में सैन्य भूमि दुर्गम इलाकों में है, इसलिए यह देश के सबसे बड़े भूमि सर्वेक्षणों में से एक है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन और डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों का उपयोग किया गया। विश्वसनीय, मजबूत और समयबद्ध सर्वेक्षण प्रक्रिया को और तेज करने के लिए ड्रोन इमेजरी और सेटेलाइट इमेजरी का भी सहयोग लिया गया। राजस्थान में पहली बार लाखों एकड़ रक्षा भूमि के सर्वेक्षण के लिए ड्रोन इमेजरी आधारित सर्वेक्षण तकनीक का उपयोग किया गया। भारत के महासर्वेक्षक की सहायता से पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण कुछ ही हफ्तों में किया गया, जिसमें पहले वर्षों लग जाते थे।
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के सहयोग से डिजिटल एलिवेशन मॉडल (डीईएम) का उपयोग करके पहाड़ी क्षेत्र में रक्षा भूमि का सर्वेक्षण करने के लिए 3डी मॉडलिंग तकनीक भी शुरू की गई। पिछले 6 महीनों के दौरान रक्षा भूमि का सर्वेक्षण बहुत तेज गति से आगे बढ़ा, जिससे पिछले वर्ष के दौरान 17.78 लाख एकड़ में से 8.90 लाख एकड़ का सर्वेक्षण किया गया। रक्षा भूमि पर अतिक्रमणों का पता लगाने के लिए टाइम सीरीज़ सेटेलाइट इमेजरी पर आधारित रीयल टाइम चेंज डिटेक्शन सिस्टम के लिए एक परियोजना भी शुरू की गई है। नवीनतम सर्वेक्षण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में रक्षा संपदा अधिकारियों की क्षमता निर्माण के लिए एनआईडीईएम (राष्ट्रीय रक्षा संपदा प्रबंधन संस्थान) में भूमि सर्वेक्षण और जीआईएस मैपिंग पर उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) भी स्थापित किया गया है।
रक्षा मंत्री ने पिछले महीने उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन करते हुए डीजीडीई संगठन को जीआईएस आधारित प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने में क्षेत्र सर्वेक्षण और निर्माण क्षमता में उत्कृष्टता जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। पूरे भारत में फैली लगभग 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि के सर्वेक्षण की यह विशाल कवायद भूमि सर्वेक्षण के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने का एक अनूठा उदाहरण है। राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र और राष्ट्रीय भू-सूचना विज्ञान संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से इस तरह का विशाल सर्वेक्षण पूरा हो पाया है। सैन्य भूमि के इस सर्वेक्षण से सीमा विवादों को कम करने और विभिन्न स्तरों पर कानूनी विवादों को हल करने में भी मदद मिलेगी।
