बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की परेशानियां बढ़ीं

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झांसी, 09 जनवरी (हि.स.)। कहा जाता है कि भारत की 63 प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है। गांवों के लोग खेती पर ही निर्भर रहते हैं और खेती को मानसूनी जुआ कहा जाता है। बुंदेलखंड में किसान प्राकृतिक आपदाओं से जूझता ही रहता है। कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि और कभी ओलावृष्टि किसान की परेशानियों को बढ़ाते रहते हैं। पिछले 4 दिनों से किसानों की सांसें अटकी हुई हैं। ओलावृष्टि ने बीते रोज बबीना विकासखंड के करीब बारह से अधिक गांवों की फसलों को बर्बाद कर दिया था। रविवार की सुबह से ही ओलावृष्टि ने टहरौली तहसील के विकासखंड गुरसरांय और बंगरा विकासखंड के कम से कम 24 गांवों में ओलावृष्टि ने तबाही मचाई। किसान बची हुई फसलों को बचाए रखने के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं
रविवार की सुबह करीब साढ़े 9 बजे अचानक टहरौली, गुरसरांय एवं बंगरा विकासखंड के सेमरी कछियान, सुजवा, टोड़ी फतेहपुर, कर्री, पण्डवहा, रजवारा, बाँध मदरवास, बेरबई, किशोरपुरा, महेवा, राजापुर,बढ़वार, पुरातनी, बंगरा, भिटौरा,उरदौरा, तेजपुरा, धनाई, बहेरा, चुराई, खिसनी समेत कई अन्य गांवों में भी ओलावृष्टि हुई। इसके अलावा जनपद की सीमा से सटे मप्र के निवाड़ी एवं पृथ्वीपुर के टेहरका, मगरपुर समेत तमाम गांवों में ओलावृष्टि हुई। इससे खेतों में कई इंच ओलों की पर्त जम गई। किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। इसके अलावा मऊरानीपुर के आसपास कई गांवों में भीषण बारिस भी हुई। इससे खेतों में घुटनों से ऊपर पानी भर गया। इसके साथ ही सर्दी के बीच हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण ठिठुरन भी बढ़ गई है। बारिश का यह सिलसिला बीते 4 दिन पूर्व शुरू हुआ था। मौसम विभाग की मानें तो यह क्रम आगामी सप्ताह भर तक चल सकता है। आने वाले 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्यौहार भी है। इसके चलते भी मौसम में परिवर्तन होता रहेगा।
गांव के किसानों की मानें तो सुबह साढ़े 9 बजे के समय भी बादलों के घिरने के बाद अंधेरा छा गया था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि रात फिर से हो गई है। यहां तक कि बढ़वार गांव के निवासी किसान ब्रजनंदन ने बताया कि गांव के गलियारों में लगी स्ट्रीट लाइट अचानक जल उठी थी। जोकि सामान्यतः रात में ही जलती हैं। ऐसा ही हाल टोड़ी फतेहपुर समेत अन्य गांवों का भी था।


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