कोरोना की तीसरी लहर और हर्ड इम्युनिटी विकसित होने की संभावना
बेगूसराय, 09 जनवरी (हि.स.)। कोरोना की तीसरी लहर की शुरूआत हो चुकी है, संक्रमितों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान पिक 86 दिन में आया था और 50 दिनों का समय केस घटने में लगा था। सात अप्रैल 2021 को एक लाख मरीजों की क्षमता थी, 17 अप्रैल को दो लाख, 23 अप्रैल को तीन लाख, जबकि आठ मई को चार लाख और 26 जून को कोरोना ने अपने न्यूनतम आंकड़े को स्पर्श किया। इस लिहाज से अगर देखा जाय तो दूसरी लहर का पिक 26 दिन तक रहा।
कोरोना अध्ययन कर रहे डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि इस बार अर्थात तीसरी लहर का ट्रेंड काफी भिन्न है। 27 दिसम्बर 2021 से छह जनवरी 2022 तक ही मरीजों की संख्या एक लाख 36 हजार के पार चली गई, पिछले 24 घंटे में करीब एक लाख 60 हजार लोग संक्रमित पाए गए हैं। कहने का अर्थ है कि दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर चार से पांच गुना अधिक तेजी से फैल रही है। पिक का अर्थ ही होता है हर तीसरे सेंपल का संक्रमित निकलना। ऐसी स्थिति में संक्रमण जितनी तेजी से फैलती है, उतनी तेजी से कम भी होती है क्योंकि पिक के बाद जांच के लिए मरीजों की संख्या ही कम हो जाती है। इस लिहाज से अगर देखा जाय तो तीसरी लहर व्यापक रूप से लोगों को प्रभावित करेगा जिससे हर्ड इम्युनिटी विकसित होने के प्रबल आसार हैं।
डॉ. अभिषेक ने बताया कि मनुष्य या किसी जीव के शरीर में जो इम्युनिटी या रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है वह दो प्रकारों में विभाजित की जाती है, जन्मजात तथा उपार्जित। जन्मजात रोग प्रतिरोधी क्षमता वह है जो शरीर में जन्म के साथ पाई जाती है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि जन्मजात रोग प्रतिरोधी क्षमता गर्भावस्था से ही शरीर में सतत रूप से विकसित होने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता है। जबकि उपार्जित रोग प्रतिरोधी क्षमता का विकास जन्म के बाद पैथोजन के संपर्क में आने के बाद होता है। उपार्जित इम्युनिटी के कार्य का प्रमुख आधार पैथोजन के प्रति इम्यून सिस्टम के सेल्स की मेमोरी है। आसान भाषा में इस प्रकार से समझा जा सकता है कि जो पैथोजन शरीर पर पहली बार आक्रमण करता है, उसके विरुद्ध किये गए फाइट को इम्यून सेल्स याद रखती है और पैथोजन जब शरीर पर दुबारा आक्रमण करता है तो हमारी इम्यून सेल्स अपने मेमोरी के आधार पर उस पैथोजन का सफाया करती है। हर्ड का अर्थ होता है झुंड या समूह, इसलिए हर्ड इम्युनिटी का सामान्य अर्थ होता है झुंड या समूह में किसी विशेष पैथोजन के प्रति एक समान इम्युनिटी का विकसित होना। जब किसी पॉपुलेशन का 60 से 70 प्रतिशत आबादी में किसी खास वायरस से उत्पन्न बीमारी का प्रसार हो चुका होता है तो उस पॉपुलेशन में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
कोरोना और हर्ड इम्युनिटी के बारे में विस्तृत ब्यौरा कोरोना डायरी : इंडिया फाइट्स अगेंस्ट कोविड-19 में लिखा है। उस किताब में यह संभावना व्यक्त की गई थी कि कोरोना के प्रति हर्ड इम्युनिटी विकसित होने में दो से तीन साल का समय लग सकता है। ऐसा महसूस होता है कि शायद ओमिक्रोन के कारण आने वाली तीसरी लहर में हर्ड इम्युनिटी का विकास हो जाये और हम इस महामारी को बीमारी में बदलते देख सकें। लेकिन तब तक सतर्क और जागरूक बने रहना होगा, थोड़ी सी लापरवाही भी मारक हो सकती है। जब तक कोरोना नियंत्रित नहीं हो जाए तब तक कोरोना के लिए सुरक्षात्मक उपायों मास्क, टीकाकरण और समाजिक दूरी को अपनाए रखें।
