मुख्यमंत्री ने प्रदेश के पहले स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट का किया शिलान्यास

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केंद्र सरकार ने दिए 16.50 करोड़, 10 करोड़ से बनेगी बिल्डिंग
– ढाई करोड़ से खरीदे जाएंगे उपकरण, चार करोड़ से बनेगा हॉस्टल
– ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ महाराज की मूर्ति का अनावरण भी हुआ
गोरखपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण में प्रदेश के पहले स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) का शिलान्यास किया। इस दौरान ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ महाराज की मूर्ति का अनावरण भी हुआ।
इसके लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पहले ही मंजूरी दे दी थी और 16.50 करोड़ रुपये आवंटित भी कर दिए हैं। इसमें 10 करोड़ रुपये से बिल्डिंग निर्माण होगा, जबकि 2.50 करोड़ रुपये से उपकरण खरीद किये जाएंगे। चार करोड़ रुपये से छात्रावास का निर्माण होगा।
पर्यटन विभाग द्वारा संचालित इस संस्थान में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कम खर्च पर होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। इससे न केवल गोरखपुर, बल्कि पूर्वांचल समेत बिहार से सटे जिलों और नेपाल के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा। शहर के होटलों के साथ इस संस्थान का अनुबंध भी होगा ताकि अध्ययन पूर्ण करने वाले छात्रों को तत्काल प्लेसमेंट भी मिल सके।
करीब चार महीने पहले ही मानव संसाधन विकास प्रभाग के उप महानिदेशक, प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव और महाप्रबंधक पर्यटन एवं संस्कृति विभाग से इंस्टीट्यूट निर्माण के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर भेजने का निर्देश दिया था। मानव संसाधन विकास प्रभाग की तरफ से राज्य सरकार को इंडियन होटल मैनेजमेंट (आईएचएम) सोसायटी में इस इंस्टीट्यूट का पंजीकरण कराया जाएगा।
अनुमानित लागत से अधिक खर्च होने की दशा में उसका वहन राज्य सरकार करेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए अपनी सहमति दी है। जुलाई में पिपराइच ब्लॉक के अगया गांव में पांच एकड़ जमीन इंस्टीट्यूट के नाम अंकित कर दी गई थी, लेकिन महाप्रबंधक पर्यटन विभाग ने इसे अनुपयोगी बताते हुए जिला प्रशासन को दूसरी जगह जमीन चिह्नित करने के लिए कहा था। डीएम विजय किरन आनंद ने सीईओ गीडा को गीडा क्षेत्र में ही इंस्टीट्यूट के लिए जमीन चिह्नित करने को कहा था। आखिरकार गीडा में ही इंस्टीट्यूट के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई।
संस्थान में होटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में डिप्लोमा से लेकर बैचलर एवं मास्टर डिग्री तक के पाठ्यक्रम संचालित होंगे। संस्थान में 400 से अधिक छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की व्यवस्था होगी। संस्थान में शिक्षकों और सभी कर्मचारियों की नियुक्ति नियमित होगी।


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