मुविवि में योग अमृत महोत्सव पर कुलपति ने कहा, प्रकृति से जोड़ता है योग

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प्रयागराज, 05 जनवरी (हि.स.)। संज्ञानात्मक, भावनात्मक एवं क्रियात्मक पक्षों का समुच्चय ही योग है। योग हमें सिखाता है कि हमें जीवन में एक दूसरे से जुड़ना चाहिए। हमें व्यक्ति, समाज, विश्व और सबसे ज्यादा प्रकृति के साथ जुड़ना पड़ेगा। योग में पारंगत होने के लिए प्रकृति प्रदत्त नियमों का पालन करना पड़ेगा।

उक्त विचार उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सीमा सिंह ने बुधवार को विश्वविद्यालय में आयोजित योग अमृत महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर व्यक्त किया। योग अमृत महोत्सव का आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के तत्वावधान में किया गया। कुलपति ने योग के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें विश्व बंधुत्व की भावनाओं को साकार करना है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि योग ने ही भारत की पहचान पूरे विश्व में बनाई है।

कुलपति ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ इस दिशा में सार्थक प्रयास करेगी। उन्होंने शोध पीठ के विकास के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। साथ ही शिक्षकों का आह्वान किया कि वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं अन्य महापुरुषों के जीवन चरित्र पर शोध कार्य कर विश्वविद्यालय को आगे ले जाने में अपना योगदान करें।

इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के निदेशक प्रो. गिरजा शंकर शुक्ल ने किया। योग अमृत महोत्सव में योग प्रशिक्षण अमित कुमार सिंह द्वारा दिया गया। संचालन डॉ दीप्ति श्रीवास्तव एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रो. पी.पी दुबे ने किया।


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