अमेरिका में कैंसर पर शोध करेगें झुंझुनू के शुक्ला दम्पति
झुंझुनू, 4 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान में झुंझुनू जिले के सौरभ शुक्ला और उनकी पत्नी शचि मित्तल शुक्ला को अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में कैंसर के शोध का जिम्मा दिया गया। वे वहां कैंसर की जेनेटिक वजह का पता लगाएंगी। ताकि वक्त रहते बीमारी की पहचान कर मरीज का इलाज किया जा सकेगा। शचि के पति सौरभ शुक्ला को यूनिवर्सिटी ने पोस्ट डॉक्टरेट की अनुमति दी है। शचि को प्रोफेसर और सौरभ को रिसर्चर बनाया गया है।
झुंझुनू निवासी सौरभ शुक्ला और उनकी पत्नी शचि मित्तल शुक्ला के बीच दिल्ली में पढ़ाई के दौरान एक-दूजे से प्यार हुआ। इसके बाद दोनों ने 2017 में लव मैरिज कर ली। दोनों ने अब अमेरिका में एक लैब शुरू की है। जिसके लिए अमेरिका की जो बाइडन सरकार ने 3 करोड़ की एक मशीन दी है। शचि ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के कारण व उनकी रोकथाम के लिए बायोप्सी पर इंफ्रारेड से कई एक्सपरिमेंट किए। 2019 में उनके 16 रिसर्च पेपर पब्लिश हुए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कैंसर बायोप्सी पर शचि ने रिसर्च कर यूनिवर्सिटी में पेटेंट फाइल किया है। इससे पहले वहां एक कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें अमेरिका के कई युवा साइंटिस्ट को बुलाया गया। इसमें रिसर्च पेपर के आधार पर शचि को पहला स्थान मिला। इसके बाद 2021 में यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में प्रोफेसर पर नियुक्ति मिल गई।
शचि और सौरभ दोनों मिलकर कैंसर पर रिसर्च करेंगे। शचि की स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ में हुई थी। शचि 11वीं-12वीं में औसत स्टूडेंट थीं। इसके बाद भी 2014 में दिल्ली से बायो इंजीनियरिंग की। वह अपने बैच की सिल्वर मेडलिस्ट रही हैं। इसके बाद कैंसर डिटेक्शन बाय न्यू इमेंजिंग टेक्नोलॉजी इंफ्रारेड पर पीएडी शुरू की। इस दौरान अपने रिसर्च में कई अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड भी मिले। गौरतलब है कि सौरभ शिक्षाविद् राधा बल्लभ शुक्ला के पौत्र हैं। शचि अमेरिकी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं तो सौरभ को रिसर्चर बनाया गया है।
सौरभ की प्राथमिक शिक्षा झुंझुनू शहर के केशव आदर्श विद्या मंदिर में हुई। इसके बाद 2012 में आईआईटी दिल्ली से केमिकल इंजीनियरिंग से बी टेक किया। दो साल इंडियन ऑयल की पानीपत रिफाइनरी में जॉब की। रिसर्च में इंटरेस्ट के कारण वे यूएसए की इलिनॉइस यूनिवर्सिटी चले गए। वहां न्यूरो साइंस में प्रोटीन पर रिसर्च की। प्रोटीन के ब्रेन की फंग्क्शनिंग में पड़ने वाले प्रभावों का पता लगाया। शचि ने स्कॉलरशिप के लिए अमेरिका में आवेदन किया था। यहीं से अमेरिका जाने का उनका रास्ता खुला। उन्हें अमेरिका में फैलोशिप की ऑफर मिली तब वह अमेरिका गई। वहां रहकर पीएचडी की। शचि ने अमेरिका में एक लैब शुरू की है। अमेरिका की सरकार ने उन्हें सहयोग किया है। इसके लिए करीब तीन करोड़ की एक मशीन भी दी है। शचि अपने पति सौरभ के साथ मिलकर कैंसर पर शोध कर रही है। शचि ने बताया कि वे अमेरिका में पीएचडी स्टूडेंट को गाइड करती हैं। अमेरिका सरकार ने उनके शोध पत्र को देखते हुए काफी मदद की है।
