विश्व महिला दिवस पर कृषक महिलाओं ने साझा किया अनुभव

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प्रखंड कार्यालय में कृषक महिलाओं के समागम कार्यक्रम का हुआ आयोजन
रामगढ़, 08 मार्च (हि.स.)। जिले में इस बार विश्व महिला दिवस बड़े ही अनूठे अंदाज में मनाया गया। इस बार कामयाबी के शिखर पर पहुंची महिलाओं के बजाय कृषि में संघर्ष कर अपना मुकाम बनाने वाली महिलाओं के साथ समागम किया गया। रामगढ़ प्रखंड कार्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने जो बताया उससे यह बात स्पष्ट हो गई कि महिला हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी की कहानी लिख सकती है। स्ट्रॉबेरी की खेती हो या अचार के बाजार को राज्य स्तर पर पहुंचाने मुहिम। कद्दू के बेहतर किस्म उगाने की बात हो या कृषि उत्पादों को बाजार तक जोड़ने और कंपनियों के साथ टाइप करने की बात हो, महिलाएं पीछे नहीं हैं।
बूढ़ा खुखरा गांव की सुशीला देवी ने कहा कि स्ट्रॉबेरी की खेती ने उनकी किस्मत बदल दी है। पहले तो उन्हें यह विश्वास नहीं हुआ कि उनके खेत में भी दूसरे प्रदेशों के जैसे स्ट्रॉबेरी हो सकती है। लेकिन जब आत्मा के पदाधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों ने उन्हें प्रोत्साहित किया तो उनके खेत भी स्ट्रॉबेरी की लालिमा से चमक उठे और स्ट्रॉबेरी ने उनकी भी किस्मत चमका दी।
पतरातू प्रखंड के वीजा गांव निवासी चंचला कचछप ने बताया कि उनके गांव के खेत बंजर थे और पथरीली मिट्टी होने के कारण वहां कृषि नहीं हो पाती थी। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2008 में महिला समूह का निर्माण किया। शुरुआती संघर्षों के बाद उनके महिला समूह की संख्या बढ़ती गई और फिर वह राज्य स्तर पर अपना काम करने लगी हैं। उन्होंने बताया कि अब सभी महिलाएं ना सिर्फ बचत करती हैं, बल्कि खेती के उत्पादों को स्नेहलता एग्रो फूड प्रोड्यूसर कंपनी के साथ टाईअप कर बेचती भी हैं।उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना काल में 100 टन से अधिक तरबूज किसानों के खेत में सड़ने वाले थे। लेकिन कंपनी ने उस दौरान भी उनकी मदद की और खेतों में लगे तरबूज को उठाकर गली-गली जाकर बेचा। हालांकि उस दौरान किसानों को बहुत फायदा तो नहीं हुआ, लेकिन उनकी पूंजी भी खत्म नहीं हुई। वह कंपनी किसानों के उत्पादों को बड़े बाजार में बेचती है और उससे होने वाले मुनाफे को सीधे किसानों तक पहुंच जाती है। उनके संघर्ष के कारण उनके एफपीओ में 1003 किसान हैं, जिसमें 470 महिलाएं हैं।
अरमादाग की प्रमिला देवी ने बताया कि एक समय था की वह नमक चावल खाती थी। लेकिन जब से महिला समूह के साथ जुड़ी उनकी किस्मत बदल गई। वह ना सिर्फ बचत करना सीख रही हैं बल्कि मार्केट भाव को भी वह बखूबी समझने लगी हैं।
गड़के गांव की निवासी सरस्वती देवी ने कहा कि एक समय था कि उन्हें हर छोटी मोटी चीज के लिए पति या परिवार के दूसरे सदस्यों पर निर्भर होना पड़ता था। वर्ष 2017 में उन्होंने जब महिला समूह के साथ अपना काम शुरू किया तो उनकी किस्मत भी बदल गई है। उन्होंने कहा कि वे किसी के क्षेत्र में इतना सक्रिय हो गई हैं कि उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए जिला के पदाधिकारियों के द्वारा दिल्ली और पूरी तक भेजा गया है। आज बैंक सखी के रूप में काम कर रही हैं।
महिलाओं के अधिकार और विकास के लिए हर कदम पर मिलेगा साथ : विधायक
विधायक ममता देवी ने भी महिलाओं की पूरी कहानी सुनी और कहा कि संघर्ष की हर राह में वे उनके साथ रहेंगी। राज्य सरकार की हर योजना का लाभ महिलाओं को मिले इसके लिए अधिकारी भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि आज महिलाएं अपने कड़ी मेहनत से अपना और परिवार का विकास कर रही हैं हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहेंगी।
कृषि योजनाओं का महिलाओं के द्वारा लिया जा रहा लाभ : डीडीसी
कार्यक्रम के दौरान डीडीसी ना केंद्र सिन्हा ने बताया कि कृषि योजनाओं का लाभ अब महिलाएं खूब उठा रही हैं। पतरातू प्रखंड में 40 एकड़ जमीन पर महिलाओं के द्वारा टपक योजना का लाभ लिया जा रहा है। इसके अलावा स्ट्रौबरी, मशरूम, मकई, खीरा, ब्रोकली, कद्दू, टमाटर, लेमन ग्रास की खेती भी महिलाएं कर रही हैं।


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