अमृतपुर विधान सभा में त्रिकोणात्मक संघर्ष, निर्दल उम्मीवार सबसे भारी

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फर्रुखाबाद,19 फरवरी (हि. स.)। फर्रुखाबाद जिले की विधान सभा अमृतपुर में छिड़ी चुनावी जंग में भाजपा, सपा और निर्दल उम्मीदवार के बीच त्रिकोणात्मक संघर्ष होने जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि निर्दल उम्मीदवार सबसे भारी पड़ रहे हैं। महासमर होने के अब चंद घण्टे शेष रह गए हैं। मतदाता अब किसके साथ है यह खुलकर चर्चा करने लगा है। यहां के मतदाताओं ने पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव को चुनाव जिताकर लखनऊ पहुंचाने की ठान ली है।

बताते चले कि नरेंद्र सिंह यादव के पिता डिप्टी चीफ मिनिस्टर रह चुके है। यहां की जनता ने जब अमृतपुर विधान सभा को मोहम्मदाबाद विधान सभा के नाम से जाना जाता था उस समय बाबू राजेन्द्र सिंह यादव को चुनाव जिताकर विधान सभा पहुंचाया था। वह जमीन से जुड़े नेता थे और लगातार 6 बार विधायक चुने गए। उनके निधन के बाद बेटे नरेंद्र सिंह यादव ने जनता की सेवा की कमान संभाली। वह भी अपने क्षेत्र की जनता के जनप्रिय नेता बन गए। उन्हें भी जनता ने 5 बार चुनाव जिताकर विधान सभा पहुंचाया।सबसे खास बात यह है कि वर्ष 2008 में परसीमन के बाद मोहम्मदाबाद विधान सभा को अमृतपुर विधान सभा नाम दिया गया। इस विधान सभा में वर्ष 2012 में पहला चुनाव हुआ। इस चुनाव में नरेंद्र सिंह सपा से चुनाव लड़े। उन्होंने भाजपा के गढ़ में भाजपा उम्मीदवार सुशील शाक्य को हराकर समाजवादी झंडा फहरा दिया। वर्ष 2022 में नरेंद्र सिंह यादव का टिकट काट दिया गया। जिससे वह निर्दल उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं। मतदाताओं का स्नेह नरेंद्र सिंह के साथ होने की वजह से 20 फरवरी को होने जा रहे चुनाव में नरेंद्र सिंह यादव के छक्का लगाने के आसार नजर आ रहे है। वैसे इस विधान सभा में भाजपा उम्मीदवार सुशील शाक्य व सपा के डॉक्टर जितेंद्र सिंह तथा निर्दल उम्मीदवार नरेंद्र सिंह यादव के बीच कांटे की लड़ाई छिड़ी हुई है। मतदान के कुछ घण्टे पहले मतदाताओं की नब्ज टटोलने पर निर्दल उम्मीदवार नरेंद्र सिंह यादव सबसे भारी पड़ रहे हैं। हालांकि मतदान से कुछ घण्टे पहले मतदाताओं का जो रुख रहा वह मतदान के समय तक बदल भी सकता है।


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