अहमदाबाद का गुनहगार बचपन में छोड़ चुका गांव, घर हुआ खंडहर

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बुलंदशहर, 19 फरवरी(हि.स.)। 26 जुलाई 2008 को 70 मिनटों के अंदर सिलसिलेवार धमाके कर जिन दहशतगर्दों ने अहमदाबाद को हिला दिया, उनमें शकील भी शामिल था। शकील बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद थाना क्षेत्र के गांव लोहारका का निवासी है। शकील को अहमदाबाद सीरियल ब्लॉस्ट मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है।
शकील के पैतृक गांव लोहरका में ग्रामीणों ने बताया कि 90 के दशक में दिल्ली में हुए एक बम धमाके में शकील का नाम सामने आया था, जिसके बाद उसका पूरा परिवार गांव छोड़कर दिल्ली चला गया। शकील के बारे में ग्रामीण बताते हैं कि शकील तो बचपन में ही बाहर चला गया था। ग्रामीणों को भरोसा नहीं हो रहा है कि शकील ऐसी देशद्रोही गतिविधियों में संलिप्त हो सकता है। इस मामले में लोहारका के ग्रामीण ज्यादा कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। उन्हें नहीं पता कि अब शकील का परिवार कहां है, क्या करता है, किस हाल में है। फिलहाल शकील के पैतृक गांव में इनका एक पुराना मकान है, जोकि खंडहर में तब्दील हो गया है।
साल 2008 में 22 जुलाई को अहमदाबाद में तबाही का मंजर था।धमाकों में 56 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। 200 से ज्यादा घायल हुए। कुल 24 बम लगाए गए थे। करीब 14 साल बाद, 2008 अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट केस में स्पेशल कोर्ट का फैसला आया है। अदालत ने 49 में से 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। बाकी 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है। धमाकों की जिम्मेदारी हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी ने ली थी।


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