32 लाख रुपये मूल्य की काजल लकड़ी के दो तस्कर गिरफ्तार

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देहरादून, 18 फरवरी (हि.स.)। हिमालयी क्षेत्रों की दुर्लभ वन संपदा काजल की लकड़ी को तस्करी करते हुए पुलिस ने शुक्रवार की प्रात: दो लोगोंं को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित एक बैरियर तोड़ कर भाग निकले थे, जिन्हे दूसरे बैरियर पर दबोचा गया है।
पुलिस के अनुसार शुक्रवार की प्रात: कोतवाली उत्तरकाशी व थाना मनेरी पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र में लकड़ी तस्कर सक्रिय है तथा वह प्रतिबन्धित लकड़ी काजल की तस्करी करने हेतु आने वाले हैं। सूचना पर कार्यवाही करते हुए पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा क्षेत्र में चेकिंग अभियान चला दिया। इस दौरान पुलिस को वन विभाग बैरियर देवीधार पर एक संदिग्ध वाहन आता हुआ दिखायी दिया। पुलिस ने जब उसे रोक कर चेकिंग की तो उसमें बैठे दो तस्करों शरत सिंह निवासी पौड़ी व पेमा निवासी नेपाल को प्रतिबन्धित काजल—काठ की 318 नग लकड़ी सहित गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वह भटवाड़ी के सिल्ला क्षेत्र से इस प्रतिबन्धित लकड़ी को उत्तर—प्रदेश, सहारनपुर ले जा रहे थे, लेकिन पुलिस की सतर्कता ने इसे नाकाम कर दिया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार तस्कर गंगोरी बैरियर पर तैनात पुलिस जवानों द्वारा वाहन को रोकने पर बैरियर को टक्कर मारकर भाग निकले थे। जिस पर पुलिस ने उन्हें वन विभाग बैरियर देवीधार पर दबोच लिया गया। उसके बाद उन्हें वन विभाग की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। बरामद लकड़ी की कीमत करीब 32 लाख रुपये आंकी गयी है।
काजल की लकड़ी उच्च हिमालय के आरक्षित वन क्षेत्र में पाई जाती है। काजल औषधीय दृष्टिकोण से सर्वोत्तम मानी जाती है। बौद्ध सम्प्रदाय के लोग इसके बर्तन (बाउल) बनाकर खाद्य एवं पेय पदार्थों के लिए इस्तेमाल करते हैं। भारत, चीन, तिब्बत, नेपाल आदि देशों में इस लकड़ी की तस्करी कर उच्च कीमतों पर बेचा जाता है।


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