रेडीमेड वस्त्रों का चलन बढ़ा, परम्परागत बुनकरों व कसीदाकारों के समक्ष रोजीरोटी का संकट

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बीकानेर, 15 फरवरी (हि.स.)। श्री पीपा क्षत्रिय दर्जी समाज के लोग पूरे राजस्थान विशेषत: बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर, जालौर, उदयपुर तथा कोटा संभाग में निवास करते हैं। नामदेव छीपा समाज के लोग भी पूरे राज्य के विभिन्न जिलों में निवास करते हैं तथा श्री पीपा क्षत्रिय समाज एवं नामदेव छीपा समाज के लगभग 80-90 प्रतिशत लोग अपना परम्परागत सिलाई कार्य, कढ़ाई कार्य एवं कसीदाकारी करके अपना व परिवार का गुजारा करते हैं। गत वर्षों में औद्योगीकरण एवं मशीनीकरण के कारण रेडीमेड वस्त्रों का अधिक प्रचलन हो गया है, जिससे समाज के हजारों लोगों के सामने आजीविका संकट गहरा गया है। पहले नोटबंदी एवं बीते दो वर्षों से कोरोना महामारी के कारण समाज के लोगों की आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है तथा रोजी-रोटी का संकट हो गया है।

श्री पीपा क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष सीताराम कच्छावा ने जयपुर में शिक्षा, कला एवं संस्कृति-पुरातत्व विभाग मंत्री डॉ. बी.डी.कल्ला से मिलकर ‘सिलाई कला बोर्ड’ गठन करने की मांग की और इस सम्बन्ध में सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखकर आवश्यक कार्यवाही की बात कही। कच्छावा ने शिक्षामंत्री को देश के विभिन्न राज्यों में परंपरागत कामगार- समाजों जैसे काष्ठ-कार समाज, विश्वकर्मा समाज, सेन समाज, बुनकर समाज के परंपरागत कार्यों को संरक्षण एवं प्रोत्साहन देने के लिए तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए विभिन्न राज्यों में बोर्ड का गठन किया गया है तथा शिल्प एवं माटी कला बोर्ड-केश कला बोर्ड का गठन किया गया है। श्री पीपा क्षत्रिय समाज द्वारा गत वर्षो से लगातार पत्र/मेल प्रेषित करने के बावजूद सरकार द्वारा सिलाई कला बोर्ड का गठन नही किया गया है जबकि मध्यप्रदेश में सिलाई कला मंडल का गठन किया गया है। इससे राजस्थान के श्री पीपा क्षत्रिय समाज एवं नामदेव छीम्पा समाज में निराशा एवम आक्रोश है। कच्छावा ने श्री पीपा क्षत्रिय समाज एवं नामदेव छीपा समाज के लोगों को सिलाई कार्य हेतु अनुदान देने, ब्याज मुक्त ऋण/न्यूनतम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा सके तथा उनके उत्पादों का प्रचार-प्रसार एवं उचित मूल्य दिला कर, अन्य सहयोगी उपायों से सिलाई कला का सरंक्षण एवं विकास किया जा सके तथा इन समाजों को राजनैतिक प्रतिनिधित्व भी दिया जा सके।


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