फूलपुर सीट पर पहली बार खुला था भाजपा का खाता

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प्रयागराज, 20 जनवरी (हि.स.)। प्रयागराज जिले में फूलपुर सबसे हाई प्रोफाइल सीट मानी जाती है। इसका पंडित नेहरू के परिवार से गहरा जुड़ाव रहा है, लेकिन 1970 के दशक की शुरुआत से ही कांग्रेस यहां लगातर कमजोर होती रही है। फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से नेहरू परिवार के जुड़ाव के चलते फूलपुर विधानसभा क्षेत्र भी वीआईपी सीट मानी जाती है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पहली बार यहां जीत दर्ज करने में सफल रही थी।
वर्ष 2017 के चुनाव में फूलपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 41.94 प्रतिशत वोट पड़े। भाजपा से प्रवीण सिंह ने समाजवादी पार्टी के मंसूर आलम को 26,613 वोटों से हराया था। इसमें प्रवीण को 93,912 एवं मंसूर आलम को 67,299 मत मिले थे। वहीं, फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से केसरी देवी पटेल भाजपा की सांसद हैं। उन्होंने वर्ष 2019 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के पंधारी यादव को हराया था।
आजादी के बाद से 1967 तक फूलपुर विधनसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। 1989 में बहुजन समाज पार्टी के रमाकांत जीते तो 1991 में जनता दल को जीत मिली। जनता दल के विधायक रमाकांत यादव ने 1993 में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया और इस सीट से विजयी हुए। 1996 में कांग्रेस के रामनरेश यादव यहां से जीते। वे 2002 में दोबारा विधायक चुने गए। 2007 में इस सीट से समाजवादी पार्टी के अरुण कुमार यादव ने जीत दर्ज की। 2012 में समाजवादी पार्टी के सईद अहमद ने अपनी पार्टी की जीत का सिलसिला बरकरार रखा, लेकिन 2017 में इस सीट पर भाजपा के प्रवीण कुमार सिंह ने अपनी पार्टी का खाता खोला। इससे पहले इस सीट पर भाजपा कभी जीत नहीं पाई थी। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने फूलपुर संसदीय क्षेत्र से तीन बार जीत दर्ज की थी। पंडित नेहरू यहां से 1952, 1957 और 1962 के चुनाव में विजयी हुए थे। वहीं, विधानसभा सीट पर आजादी के बाद से ही 1967 तक कांग्रेस का कब्जा रहा।
फूलपुर विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1977 में जनता पार्टी के पद्माकर को 27,238 वोट मिले थे और उन्होंने कांग्रेस के अबुल कलाम को पराजित किया था। अबुल कलाम को 19,317 मत मिले थे। 1980 में अबुल कलाम को सफलता मिली और उन्होंने जनता पार्टी के राम नरेश को हराया। 1985 में आईसीजे के रमाकांत ने कांग्रेस के अबुल कलाम को हरा दिया। 1989 में बसपा का खाता खुला और बसपा से रमाकांत ने पुनः कांग्रेस के अबुल कलाम को पराजित कर दिया। 1991 में रमाकांत जनता पार्टी से चुनाव जीते, उन्होंने भाजपा से नरेन्द्र कुमार को पराजित किया। 1993 में सपा का खाता खुला। रमाकांत सपा से लड़े और भाजपा के अयोध्या प्रसाद को हराया। 1996 में कांग्रेस से रामनरेश यादव ने सपा की रंजना यादव को पराजित कर सीट पर कब्जा किया। 2002 में रामनरेश यादव पुनः जीते, उन्होंने बसपा के राम किशन को हराया। 2007 में सपा के अरुण कुमार यादव ने बसपा के इमरान को हराया। 2012 में सपा से सैयद अहमद ने बसपा से प्रवीण पटेल को हरा कर कब्जा कर लिया, लेकिन 2017 में मोदी लहर के दौरान भाजपा पहली बार जीती। भाजपा उम्मीदवार प्रवीण सिंह ने सपा के मंसूर आलम को हराया। अब 2022 के चुनाव में भाजपा सीट बरकरार रखने की कोशिश में जुटी हुई है।


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