अचानक बदला मौसम का मिजाज, कृषि विज्ञान केन्द्र ने जारी किया एडवाइजरी

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बेगूसराय, 29 दिसंबर (हि.स.)। मौसम में अचानक हुए बदलाव तथा मंगलवार की रात से रुक-रुक कर हो रही बारिश और पूर्वा हवा के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बूंदाबांदी के कारण एक ओर ठंड बढ़ गई है, दूसरी ओर किसानों और पशुपालकों की धड़कनें बढ़ गई है। ऐसे में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के कृषि विज्ञान केंद्र बेगूसराय ने कृषि कार्य को लेकर समसामयिक सुझाव (एडवाइजरी) जारी किया है। वरीय वैज्ञानिक और प्रधान डॉ. राम पाल ने बताया कि अगले 24-48 घंटों में वर्षा और पूर्वा हवा चलने की संभावना को देखते हुए कृषि कार्य में सर्तकता बरतने की आवश्यकता है। खड़ी फसलों में सिंचाई मौसम देख कर करें। आलू की फसल में बदलीनुमा मौसम तथा वातावरण में नमी होने के कारण झुलसा का प्रकोप हो सकता है। इस रोग में फसलों की पत्तियों के किनारे एवं सिरे से झुलसना प्रारंभ होती है, पूरा पौधा झुलस जाता है। पत्ती पर भूरे रंग के धब्बे बनते हैं, कभी-कभी भूरे एवं काले घब्बे तने पर दिखाई देते हैं, जिससे कंद भी प्रभावित होते हैं। इस रोग के लक्षण दिखने पर डाईइथेन एम-45 फफूंदनाशक का छिड़काव दस दिनों के अंतराल पर करें। आलू में कजरा पिल्लू दिखने पर फसल में क्लोरपायरीफॉस-20 ईसी छिड़काव करें। दोनों दवाओं को मिलाकर भी छिड़काव कर सकते हैं।

पिछात आलू में नेत्रजन खाद देकर मिट्टी चढ़ाएं। विलंब से बोयी गयी गेहूं की फसल जो 21 से 25 दिनों की हो गयी हो, उसमें 30 किलो नत्रजन प्रति हेक्टेयर दें। गेहूं की बुआई के 30 से 35 दिनों के बाद (पहली सिंचाई के बाद) गेहूं की फसल में कई प्रकार के खर-पतवार उग आते हैं तथा बढ़वार को प्रभावित करती है, उपज प्रभावित होता है। खरपतवारों के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फयुरॉन एवं मेटसल्फयुरॉन का छिड़काव करें। नवंबर के शुरु में बोयी गई रबी मक्का की फसल जो 50 से 60 दिनों की अवस्था में है, इनमें नेत्रजन खाद देकर मिट्टी चढ़ाएं। मक्का की फसल में तना बेधक कीट की निगरानी करें, उपचार के लिए फसल में फोरेट-10 जी या कार्बोफ्यूरान-तीन जी पौधा के गाभा में दें। फसल के अधिक नुकसान होने पर डेल्टामिथिन का छिड़काव करें। गाजर, मटर, टमाटर, धनियां, लहसून में माई झुलसा रोग की निगरानी करें।

बदलीनुमा मौसम तथा वतावरण में नमी होने पर बीमारी फसलों में काफी तेजी से फैलती है। रोग के लक्षण दिखने पर डाईइथेन एम-45 फफूंदनाशक दवा का दस दिनों के अंतराल पर दो-तीन छिड़काव करें। पिछात मटर में निकाई-गुराई करें, फली छेदक कीट की निगराणी करें। इस कीट के पिल्लू फलियों में जालीनूमा आवरण बनाकर उसके नीचे फलियों में प्रवेश कर अंदर ही अंदर मटर के दानों को खाती रहती हैं। कीट प्रबंधन के टी आकार का पंछी बैठका लगाएं। अधिक नुकसान होने पर क्वीनालफास-25 ईसी या नोवाल्युरॉन-10 ईसी का छिड़काव करें। बैगन की फसल को तना एवं फल छेदक कीट से बचाने के लिए ग्रसित तना एवं फलों को नष्ट कर दें, यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड-48 ईसी का छिड़काव करें। सर्दी के मौसम से दुधारु पशुओं को एक किलो अतिरिक्त दाना मिश्रण दें तथा साफ ताजा पानी पिलाएं। दाना मिश्रण में तिलहन अनाज एवं खल्ली की मात्रा बढ़ा दें। पशु बाड़े के फर्श को सूखा रखें, बछड़े-बछड़ियों को रात के समय बंद कमरे में रखें एवं पुआल का बिछावन दें।


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