कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर स्थायी प्रदर्शनी का अनावरण

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नई दिल्ली, 24 दिसंबर (हि.स.)। दिल्ली मेट्रो परिचालन के 20वें वर्ष की शुरूआत के अवसर पर दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन (शहीद स्थल-रिठाला) के लिए शुक्रवार को प्रथम स्वदेशी आई-एटीएस (देश में विकसित – ऑटोमेटिक ट्रेन सुपरविजन) टेक्नोलॉजी के फील्ड ट्रायल का उद्घघाटन शहरी कार्य मंत्रालय सचिव दुर्गा शंकर मिश्र और डीएमआरसी ने वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया।

इस अवसर पर मिश्र ने कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर विकसित की गई ‘दिल्ली मेट्रो की गौरवशाली यात्रा का चित्रण’ संबंधी एक प्रदर्शनी का उद्घघाटन भी किया। यह वही स्थल है, जहां तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2002 में आज ही के दिन राष्ट्रीय राजधानी में मेट्रो के सबसे पहले कॉरिडोर का उद्घघाटन किया था। इसे एक पूर्ण प्रदर्शनी के रूप में रि-डेवलप किया गया है जो आगंतुकों को अमूल्य फोटोग्राफ और कहानियों के माध्यम से भारत में जन पारवहन के क्षेत्र में नई क्रांति का सूत्रपात करने वाले उस ऐतिहासिक दिन को याद कराती हैं। यह प्रदर्शनी स्थायी तौर पर लगाई गई है और दिल्ली मेट्रो के सबसे बड़ी इंटरचेंज सुविधा का उपयोग करने वाले यात्री किसी अतिरिक्त खर्च के बिना यह प्रदर्शनी देख सकेंगे।

इस समारोह के दौरान डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. मंगू सिंह, मुख्य प्रबंध निदेशक आनंदी रामलिंगम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थिति रहे। इस आई-एटीएस टेक्नोलॉजी का विकास डीएमआऱसी और बीईएल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है और इसे रेड लाइन पर क्रियान्वित किया जा रहा है। इस उपलब्धि के साथ, भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनका अपना एटीएस उत्पाद है जिसे अन्य मेट्रो के साथ ही साथ रेल प्रणालियों पर भी क्रियान्वित किया जा सकता है।
आई-एटीएस सिस्टम का विकास मेट्रो रेलवे के लिए देश में ही निर्मित सीबीटीसी (कम्यूनिकेशंस बेस्ड ट्रेन कंट्रोल) आधारित सिगनलिंग टेक्नोलॉजी के विकास की ओर एक बड़ा कदम है क्योंकि आई-एटीएस सीबीटीसी सिगनलिंग सिस्टम का एक महत्वपूर्ण सब-सिस्टम है। एटीएस एक कंप्यूटर आधारित सिस्टम है, जो ट्रेन परिचालन को नियंत्रित करता है। यह सिस्टम मेट्रो जैसे उच्च सघनता वाले ऑपरेशन के लिए अनिवार्य है जहां प्रत्येक कुछ मिनट में सेवाएं निर्धारित हैं।
आई-एटीएस स्वदेशी टेक्नोल़ॉजी है जो भारतीय मेट्रो की ऐसी टेक्नोलॉजी डील करने वाले विदेशी वेंडरों पर निर्भरता को महत्वपूर्ण रूप से कम करेगी। वहीं सीबीटीसी जैसे टेक्नोलॉजी सिस्टम मुख्यतः यूरोपीय देशों और जापान द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं। भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ पहल के भाग के रूप में, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने सीबीटीसी टेक्नोलॉजी का स्वदेशीकरण का निश्चय किया।
डीएमआरसी के साथ नीति आयोग, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड (बीईएल), आरडीएसओ और सी-डेक इस विकास में भागीदार हैं। इस प्रोजेक्ट को आगे बढाने के लिए डीएमआऱसी और बीईएल ने पिछले वर्ष एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया हैं। डीएमआरसी और बीईएल गाजियाबाद की एक समर्पित टीम ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर एक महत्वपूर्ण कदम उठाने के लिए चौबिसों घंटे मिलकर कार्य किया है।

आई-एटीएस सिस्टम का आगामी फेज-4 कॉरिडोरों में भी उपयोग किया जाएगा। फेज-4 कॉरिडोरों में आई-एटीएस सिस्टम का उपयोग करते हुए भावी (प्रेडिक्टिव) मेंटनेंस मॉड्यूल की भी शुरूआत की जाएगी।


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