छत्तीसगढ़ में आरटीई के दस वर्ष : स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. टेकाम ने जारी की रिपोर्ट

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रायपुर, 23 दिसंबर (हि.स.)। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने गुरुवार को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) की विगत 10 वर्षो में प्राप्त उपलब्धि की ‘इंडस एक्शन’ द्वारा तैयार रिपोर्ट जारी की।

इस रिपोर्ट की सबसे सुखद बात राज्य में आरटीई के तहत बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलना है। बीते 10 सालों में राज्य में आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिंगानुपात में 7 फीसद की कमी आई है। वर्ष 2010-11 में विद्यार्थियों के लिंगानुपात के अंतर 10 प्रतिशत था जो वर्ष 2019-20 में घटकर मात्र तीन प्रतिशत रह गया है। आरटीई के तहत पात्र परिवारों के बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए शुरू किए गए वेबपोर्टल से दाखिले की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी हुई है। जिसके चलते बीते तीन वर्षों में आरटीई के तहत दाखिला लेने वालों की दर में साढ़े 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

शैक्षणिक सत्र 2020-21 में कोरोना के मुश्किल दौर में भी राज्य में आरटीई के तहत 52 हजार 260 छात्रों का दाखिला मिला है। उल्लेखनीय है कि आरटीई के अंतर्गत गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को अपनी कुल सीटों के 25 प्रतिशत सीट पर अधिनियम के तहत आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्गो के बच्चों का दाखिला लेना अनिवार्य है।

स्कल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा है कि आरटीई अधिनियम को लागू करने में छत्तीसगढ़ सबसे अग्रणी राज्य रहा है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में पिछले 10 वर्षों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम में किये कार्य और प्रभाव को दर्शाना है। यह रिपोर्ट छत्तीसगढ़ में उपलब्ध आरटीई पोर्टल पर उपस्थित जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इस अवसर पर इंडस एक्शन की सीनियर लीड माधुरी धाड़ीवाल, सीनियर मैनेजर मधु वर्मा, मैनेजर लक्ष्मी प्रिय आर. उपस्थित थी।


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