अब धरातल पर दिख रहा सरकारों का कार्य : आनंदीबेन पटेल

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मेरठ, 22 दिसम्बर (हि.स.)। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने कोई कार्य नहीं किया, जो दिखाई दें। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने पर सरकार के कार्य धरातल पर दिखाई दे रहे हैं। मेरठ भी प्रगति की राह पर अग्रसर है। चौधरी चरण सिंह विवि के 33वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने मेधावियों को पदक वितरित किए।

चौधरी चरण सिंह विवि के दीक्षांत समारोह का आयोजन नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में किया गया। समारोह में कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सतयुग से लेकर अब तक मेरठ का बड़ा योगदान रहा है। खेल जगत में आगे रहने के साथ-साथ चीनी के क्षेत्र में भी मेरठ का बड़ा नाम है। देश की पहली रैपिड रेल मेरठ तक बनाई जा रही है। खेलों के क्षेत्र में मेरठ लगातार आगे बढ रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेजर ध्यानचंद खेल विवि भी मेरठ को दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में देश लगातार प्रगति कर रहा है। पूर्व सरकारों पर तंज कसते हुए राज्यपाल ने कहा कि अब सरकार का कार्य दिखाई दे रहा है। 40 साल पहले बनी सरयू नदी परियोजना की उस समय लागत 100 करोड़ थी, लेकिन अब उस पर 10 हजार करोड़ रुपए खर्च करना पडा है। इसी तरह की दूसरी अधूरी परियोजनाओं के साथ-साथ नई परियोजनाओं पर भी कार्य हो रहा है।

राज्यपाल ने पदक पाने वालों में छात्राओं की संख्या ज्यादा होने पर कहा कि यह देखकर अच्छा लगता है कि नारी शक्ति आगे बढ़ रही है। अभिभावक छात्रों को भी पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। पदक प्राप्त करने के लिए छात्र-छात्राओं के बीच प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, लेकिन छात्र तो बहुत पीछे रह गए। छात्र सोचते होंगे कि राजनीति में चले जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। राज्यपाल ने विवि की प्रगति को सराहा। राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में 48 मेधावियों को पदक प्रदान किए।

मुख्य अतिथि औद्योगिक विकास अध्ययन संस्थान नई दिल्ली के निदेशक प्रो नागेश कुमार ने भी छात्र-छात्राओं को लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने छात्र जीवन के संस्मरण भी सुनाए। विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि बेटी पढे़, आगे बढे़ का असर दीक्षांत समारोह में भी दिखाई दे रहा है। यहां 48 पदकों में से केवल तीन छात्रों ने प्राप्त किए हैं, बाकी पदक छात्राओं ने पाए हैं। छात्रों को भी इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। दीक्षा मिलना शिक्षा का अंत नहीं है। बल्कि एक विद्यार्थी जीवन भर सीख सकता है। प्रदेश सरकार विवि और कॉलेजों में ऐसा परिवर्तन लाना चाह रही है कि छात्र पढ़ाई के दौरान ही रोजगार पा सकें। इसके लिए शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच अनुबंध हो रहे हैं।

दीक्षांत समारोह में 206 स्वर्ण पदक दिए। पहले चरण में राज्यपाल ने केवल कुलाधिपति स्वर्ण पदक, पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा और प्रायोजित पदक दिए। बाकी कुलपति स्वर्ण पदक का वितरण कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने किया। इनमें कुलपति स्वर्ण पदक 153, प्रायोजित पदक 52 शामिल है। इससे पहले सुबह आठ से नौ बजे तक उपाधियों का वितरण किया गया।


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