चंद्रबाबू नायडू ने नेता प्रतिपक्ष पद छोड़ने का किया ऐलान, वाईएसआरसीपी पर लगाए गंभीर आरोप

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विपक्षी दल टीडीपी की मांग पर अब 26 तक चलेगा शीतकालीन सत्र

दोबारा सत्ता में आने पर ही सदन में कदम रखने का लिया संकल्प



अमरावती, 19 नवंबर (हि.स.)। आंध्र प्रदेश में विपक्ष की मांग के बाद राज्य सरकार ने अब विधानसभा का शीतकालीन सत्र 26 नवंबर तक चलाने का फैसला लिया है। इसी बीच मुख्य विपक्षी दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष चन्द्रबाबू नायडू ने सत्तापक्ष के नेताओं के बयान से क्षुब्ध होकर नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ते हुए विधानसभा में न आने की घोषणा की है।

शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष तम्मिनेनी सीताराम की अध्यक्षता में हुई बिजनेस एडवाइजर कमेटी (बीएससी) की बैठक में विपक्ष दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने सत्र को एक दिन के स्थान पर 15 दिन तक चलाने का आग्रह किया था। बाद में सरकार ने सत्र को 26 नवंबर तक चलाने का निर्णय लिया। इस सत्र के दौरान सदन में 14 विधेयक रखे जाएंगे और महिला सशक्तिकरण को लेकर विधानसभा और विधान परिषद में चर्चा होगी।

विधानसभा के दूसरे दिन आज आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी टीडीपी और सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के नेताओं की जुबानी जंग चली। चंद्रबाबू नायडू के सदन में लगातार आरोप लगाने के दौरान विधानसभा अध्यक्ष तम्मिनेनी सीताराम ने उनके माइक का कनेक्शन काट दिया। इससे आहत नायडू ने विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष पद छोड़ने और दोबारा सत्ता में आने पर ही सदन में आने का ऐलान कर दिया।

इसके बाद तेलुगू देशम पार्टी कार्यालय में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में अपने परिवार के खिलाफ सत्तारूढ़ नेताओं के बयान से आहत नायडू लगभग रो दिए। नेता विपक्ष ने भावुक होकर कहा कि सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के नेता उनके खिलाफ लगातार अपशब्दों के इस्तेमाल करने से वह आहत हैं। नायडू ने कहा, ‘पिछले ढार्द साल से मैं अपमान सह रहा हूं लेकिन शांत रहा। आज उन्होंने मेरी पत्नी को भी निशाना बनाया है। मैं हमेशा सम्मान के लिए और सम्मान के साथ रहा। मैं इसे और नहीं सह सकता।’विपक्ष के नेता नायडू ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के मंत्री ने भी उनके पत्नी और पुत्र को व्यक्तिगत निजी मामले को लेकर चरित्र हनन करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी भुवनेश्वरी कभी राजनीति में नहीं रहीं, फिर भी उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विधानसभा नहीं बल्कि कौरव सभा है।

नायडू ने विधानसभा स्पीकर सीताराम पर आरोप लगाया कि विधानसभा में उनके संबोधन के दौरान अध्यक्ष ने उनके माइक का कनेक्शन काट दिया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष छोड़ने का ऐलान करते हुए कहा कि सत्ता में लौटने तक वह आंध्र प्रदेश विधानसभा सदन में कदम नहीं रखेंगे।

चंद्रबाबू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था लेकिन वे एकाकृत आंध्र प्रदेश के हित में और राज्य जनता की सेवा की कीमत पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुए थे। नायडू ने कहा कि विधानसभा में विधायक के रूप में बोलने का उन्हें पूरा अधिकार है लेकिन स्पीकर ने इसकी अनुमति नहीं दी और उन्हें रोका गया।

उल्लेखनीय है कि 2019 के विधानसभा चुनाव में तेलुगूदेशम पार्टी को वाईएसआरसीपी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा चंद्रबाबू के विधानसभा क्षेत्र चित्तौरु जिले के कुप्पम में भी तेलुगू देसम पार्टी को स्थानीय निकाय चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा था। इसी बीच सत्तारूढ़ दल वाईएसआरसीपी के सदस्यों ने नायडू के बयान को ‘नाटक’ करार दिया।


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