पंजाब कैबिनेट के सभी मंत्री 18 नवंबर को श्री करतारपुर साहिब में टेकेंगे मत्था, सीएम चन्नी का ऐलान

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धारोवाली (गुरदासपुर), 16 नवंबर ( हि.स.)। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आज ऐलान किया कि करतारपुर कॉरिडोर फिर से खुलने के बाद पहले प्रतिनिधिमंडल के तौर पर समूची पंजाब कैबिनेट 18 नवंबर को श्री करतारपुर साहिब में नतमस्तक होगी।

आज यहां पंजाब के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता सरदार संतोख सिंह रंधावा की बरसी के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व से पहले करतारपुर कॉरिडोर फिर से खोलने के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री का हार्दिक धन्यवाद किया। मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि उन्होंने कॉरिडोर को फिर से खोलने का मुद्दा प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष निजी तौर पर उठाया था। उन्होंने कहा कि यह समूचे पंजाबी भाईचारे और ख़ास तौर पर सिख भाइयों के लिए खुशी का मौका है और 18 नवंबर को समूची पंजाब कैबिनेट श्री करतारपुर साहिब में माथा टेकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार प्रगति की राह पर है और राज्य में जवाबदेह और पारदर्शी प्रशासन मुहैया करवाने के लिए क्रांतिकारी बदलाव किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकहितैषी और विकास समर्थक नीतियां बनाकर लोगों की भलाई के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि पहले ही कई पहल की जा चुकी हैं और अन्य प्रगति पर हैं।

सरदार संतोख सिंह रंधावा को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महान नेता का जीवन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि सरदार संतोख सिंह रंधावा नैतिकता, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों पर आधारित राजनीति के समर्थक थे। मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि सरदार संतोख सिंह रंधावा जनता के बीच लोकप्रिय नेता थे, जिन्होंने अपनी आखिरी सांस तक पार्टी और राज्य की सेवा की।

सरदार संतोख सिंह रंधावा के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह तब कांग्रेस में प्राथमिक सदस्य के तौर पर शामिल हुए थे, जब सरदार रंधावा पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष थे। उन्होंने कहा कि यह बड़े ही गर्व और संतोष की बात है कि उप मुख्यमंत्री सुखजिन्दर सिंह रंधावा अपने पिता की महान विरासत को आगे लेकर जा रहे हैं। मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि रंधावा को अपने पिता से ईमानदारी, मेहनत, लगन और वचनबद्धता के उच्च आदर्श विरासत में मिले हैं।


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