डीआरडीओ और वायु सेना ने स्वदेशी स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार के किये दो परीक्षण

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उपग्रह नेविगेशन और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर पर दो अलग-अलग कॉन्फ़िगरेशन देखे गए

 देश में पहली बार हुआ इस वर्ग के बम का इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सीकर आधारित उड़ान परीक्षण

 100 किमी. तक सटीक प्रहार क्षमता बढ़ाने के लिए इमेजिंग इंफ्रा-रेड सीकर तकनीक से लैस



नई दिल्ली, 03 नवम्बर (हि.स.)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना ने एक सप्ताह में दो बार संयुक्त रूप से स्वदेशी स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार के दो सफल उड़ान परीक्षण किए हैं। बुधवार को दूसरा परीक्षण राजस्थान के जैसलमेर में चंदन रेंज से वायुसेना के विमान से वेपन लॉन्च करके किया गया। यह परीक्षण उपग्रह नेविगेशन और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर पर आधारित दो अलग-अलग विन्यासों से किये गए हैं। बम के इस वर्ग का इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सीकर आधारित उड़ान परीक्षण देश में पहली बार किया गया है। इलेक्ट्रो ऑप्टिक सेंसर को स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।

सिस्टम का इलेक्ट्रो ऑप्टिकल कॉन्फिगरेशन इमेजिंग इंफ्रा-रेड (आईआईआर) सीकर तकनीक से लैस है, जो हथियार की सटीक स्ट्राइक क्षमता को बढ़ाता है। दोनों परीक्षणों में स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार ने लक्ष्य को उच्च सटीकता के साथ मार गिराया। सिस्टम को अधिकतम 100 किलोमीटर की दूरी के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्नत मार्गदर्शन और नेविगेशन एल्गोरिदम, मिशन आवश्यकताओं के अनुसार सॉफ्टवेयर का प्रदर्शन किया। टेलीमेट्री और ट्रैकिंग सिस्टम ने पूरे उड़ान के दौरान सभी मिशन कार्यक्रमों को कैप्चर किया। परीक्षण के दौरान मिशन के सभी उद्देश्यों को हासिल किया गया।

स्मार्ट एंटी एयरफील्ड हथियार को अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) ने अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के समन्वय और आईएएफ के व्यापक समर्थन से डिजाइन और विकसित किया है। इसके विकास में गुणवत्ता और डिजाइन प्रमाणन एजेंसियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), बेंगलुरु ने विमान के साथ हथियार एकीकरण किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना और मिशन से जुड़ी टीमों के प्रयासों की सराहना की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी ने भी टीमों को बधाई देते हुए कहा कि हथियार के इस प्रदर्शन से उसकी विश्वसनीयता साबित हो गई है।

पूर्वी लद्दाख में चीन से सैन्य टकराव के बीच केंद्र सरकार ने पिछले साल सितम्बर में भारतीय सेनाओं की जरूरत को देखते हुए हथियारों की खरीद के लिए 2,290 करोड़ रुपये मंजूर किये थे। इसमें 970 करोड़ से स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियारों की खरीद को भी मंजूरी मिली थी, जिससे नौसेना और वायुसेना की अग्नि शक्ति में इजाफा होगा।


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