वायुसेना ने 89वीं वर्षगांठ पर दिया ‘आत्मनिर्भर’ होने का सन्देश

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 हिंडन एयरबेस पर लड़ाकू विमानों के फ्लाईपास्ट से फिर गूंजेगा आसमान



नई दिल्ली, 07 अक्टूबर (हि.स.)। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी भारतीय वायुसेना इस साल अपने स्थापना दिवस पर परेड की थीम ‘आत्मनिर्भर’ रखकर आने वाले दशक में खुद अपने पैरों पर खड़े होने का सन्देश दे रही है। देश की सेवा करते हुए 90वें वर्ष में प्रवेश कर रही भारतीय वायुसेना आजादी के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ चार और चीन के साथ एक युद्ध में अपनी ताकत का एहसास करा चुकी है। मौजूदा समय में वायुसेना की आक्रामक स्ट्राइक क्षमता और भी अधिक शक्तिशाली हो गई है। यही वजह है कि पूर्वी लद्दाख की सीमा पर वायुसेना चीन को किसी भी आक्रामकता का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

द्वितीय विश्वयुद्ध में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका

भारतीय वायुसेना का गठन ब्रिटिशकालीन भारत में ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ के सहायक हवाई दल के रूप में किया गया था। भारतीय वायुसेना 8 अक्टूबर 1932 को तब अस्तित्व में आई जब भारतीय वायुसेना अधिनियम (1932 का संख्या XIV) भारत के संघ राजपत्र में प्रकाशित हुआ। इसके तहत रॉयल एयरफोर्स के वर्दी, बैज और प्रतीक चिन्ह अपनाए गए। 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी दौरान भारतीय वायुसेना के चिन्ह में से लाल गोला हटा दिया गया ताकि जापानी हिनोमारू (उगता सूरज) के साथ साम्य को टाला जा सके। एक अप्रैल 1933 को वायुसेना की पहली स्क्वाड्रन का गठन चार वेस्टलैंड वापिटी विमान एवं पांच पायलटों के साथ गठन किया गया लेकिन देश को आजादी मिलने तक 10 स्क्वाड्रन हो गई थीं।

भारत के पूर्ण गणतंत्र घोषित होने पर मिटी ब्रिटिश पहचान

ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने पर 1947 में जब भारत दो भागों में बंटा तो भौगोलिक विभाजन के साथ ही ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ भी दोनों देशों में बांट दी गई। भारत की वायुसेना का नाम रॉयल इंडियन एयरफोर्स ही रहा लेकिन इसकी दस में से तीन स्क्वाड्रन पाकिस्तान के हिस्से में चली गईं। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी सेना को घुसते देख महाराजा हरि सिंह के मदद मांगने पर रॉयल इंडियन एयरफोर्स और सैन्य टुकड़ियों ने पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर में घुसने से रोक दिया। इस तरह भारत-पाकिस्तान में पूर्णतया: युद्ध छिड़ गया। भारत और पाकिस्तान के बीच एक वर्ष, दो महीने, एक सप्ताह और तीन दिन तक चले पहले युद्ध में वायुसेना की अहम भूमिका रही। भारत को 1950 में गणतंत्र घोषित करते ही इसके नाम से ‘रॉयल’ शब्द हटाकर सिर्फ इंडियन एयरफोर्स कर दिया गया और उसी समय से मौजूदा प्रतीक चिन्ह अपना लिया गया।

बालाकोट और उड़ी सर्जिकल स्ट्राइक

आजादी के बाद से ही भारतीय वायुसेना पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ चार युद्धों एवं चीन के साथ एक युद्ध में अपना योगदान दे चुकी है। अब तक इसने कई बड़े मिशनों को अंजाम दिया है जिनमें ऑपरेशन विजय, गोवा का अधिग्रहण, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस एवं ऑपरेशन पुमलाई शामिल हैं। ऐसे कई विवादों के अलावा भारतीय वायुसेना संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन का भी सक्रिय हिस्सा रही है और अभी भी है। भारतीय इतिहास में 28 सितंबर 2016 को उड़ी सर्जिकल स्ट्राइक और 26 फरवरी 2019 को बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के तौर पर याद किया जाएगा। यह दोनों ऐसे बड़े ऑपरेशन थे जिनमें नियंत्रण रेखा पार करके आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया था। भारतीय वायुसेना ने यह दोनों सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तानी हमलों के 10-10 दिनों के भीतर करके बदला लिया था।

भारत के पहले राष्ट्रपति ने दिया था ‘प्रेसिडेंट कलर’

भारतीय वायुसेना भारत की सशस्त्र सेना का एक अंग है जो वायु युद्ध, वायु सुरक्षा एवं वायु चौकसी का महत्वपूर्ण काम देश के लिए करती है। भारतीय वायुसेना की 89वीं वर्षगांठ पर 08 अक्टूबर को हिंडन एयरबेस में होने वाले शानदार परेड में 274 वायु योद्धाओं का साहस, पराक्रम और अद्भुत तालमेल देखने को मिलेगा। वायुसेना दिवस पर लड़ाकू विमानों के फ्लाईपास्ट से फिर आसमान गूंजेगा और दुनिया का सबसे बड़ा तिरंगा भी फहराया जाएगा। एक महीने से अभ्यास कर रहे ‘वायु योद्धा’ अब 08 अक्टूबर को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। वायुसेना को 01 अप्रैल 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘राष्ट्रपति कलर’ से सम्मानित किया गया था। वायुसेना के रंग तब से प्रमुख औपचारिक परेडों में प्रदर्शित होते रहे हैं और 08 अक्टूबर को फिर एक बार दिखाई देंगे।


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