सुराज इंडिया ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव दहिया कोर्ट की अवमानना के दोषी करार

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नई दिल्ली, 29 सितंबर (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने सुराज इंडिया ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव दहिया के खिलाफ 25 लाख का जुर्माना जमा नहीं करने के आदेश का पालन नहीं करने और कोर्ट में पेश नहीं होने पर उन्हें कोर्ट की अवमानना का दोषी करार दिया है। जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश जारी किया।

कोर्ट ने कहा कि अवमानना का दोषी ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे वो कीचड़ फेंकेगा और चाहे वह कोर्ट या सरकारी कर्मचारी हो, जो कीचड़ से घबराकर पीछे हट जाएंगे। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि वो पीछे हटने को तैयार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दोषी की ओर से दिए गए माफीनामे में पछतावा का कोई भाव नहीं है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि वह दोषी को एक मौका और देना चाहता है। कोर्ट ने दोषी को 7 अक्टूबर को पेश होकर सजा पर अपनी बात रखने का आदेश दिया।

कोर्ट ने 8 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने दहिया से कहा था कि न्याय अपनी नजर और नजरिये से चलता है, आपकी इच्छा से नहीं। न्याय व्यवस्था में एक ही पक्ष जीतता है और दूसरा हारता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि न्याय हुआ ही नहीं, न्याय वह नहीं होता जो आप चाहते हैं। कोर्ट ने दहिया से कहा था कि आप न्याय-व्यवस्था को ही दोष दे रहे हैं और न्यायपालिका और जजों को जो मर्जी में आ रहा है वह बोलते जा रहे हैं। कोर्ट ने दहिया से कहा था कि आप अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चलाकर किसी को मार दो और फिर कहो कि गलती मेरी नहीं है, लाइसेंस देने वाले की है। ये तरीका नहीं चलेगा लेकिन आपकी आदत है कि इतना कीचड़ उछालो कि सामने वाला खुद ही पीछे हट जाए।

उल्लेखनीय है कि 5 अप्रैल को कोर्ट ने आदेश पालन नहीं करने पर राजीव दहिया के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि दहिया जानबूझकर कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। पिछली फरवरी में कोर्ट ने दहिया के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था।

दरअसल, महत्वहीन मामलों को दाखिल करने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई, 2017 में दहिया पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। सुराज इंडिया ट्रस्ट ने दस सालों में 64 जनहित याचिकाएं दाखिल की थीं जिसमें से ज्यादातर मामले खारिज हो गए। सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए एनजीओ और उसके अध्यक्ष को ये सजा दी थी। तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने एनजीओ और उसके अध्यक्ष राजीव दहिया पर याचिका दाखिल करने पर हमेशा के लिए रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि आपने अब तक जितनी भी याचिकाएं दाखिल कीं, सभी खारिज हुई हैं । आखिर आप ऐसा कैसे कर सकते हैं ।


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