22 सितंबर: इतिहास के पन्नों में

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नानक कहत जगत सब मिथ्या, ज्यों सुपना रैनाईः सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव जी ने 22 सितंबर 1539 को करतारपुर में अपना शरीर त्यागा था। गुरुनानक का व्यक्तित्व धर्म एवं समाज सुधारक, विचारक, भक्त कवि और विश्व बंधुत्व के प्रेरक तत्वों से सजा था। उनके कथन में इसकी बानगी देखिये- ‘मेरो मेरो सभी कहत हैं, हित सों बाध्यो चीत/ अंतकाल संगी नहिं कोऊ, यह अचरज की रीत।’

संत साहित्य में गुरुनानक देव जी का विशेष महत्व है। प्रख्यात आलोचक और निबंधकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ में भक्तिकाल की निर्गुण धारा से संबंध रखने वाले गुरुनानक देवजी के बारे में लिखा है- ‘भक्ति भाव से पूर्ण होकर वे जो भजन गाया करते थे, उनका संग्रह (संवत् 1661) ग्रन्थ साहब में किया गया है।’

1469 में कार्तिक पूर्णिमा को पंजाब (अब पाकिस्तान) क्षेत्र में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गांव में खत्री कुल में गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ। 16 साल की उम्र में उनका विवाह हो गया और दो पुत्रों के जन्म के बाद गुरुनानक देव जी अपने चार साथियों मरदाना, लहना, बाला और रामदास के साथ तीर्थयात्रा पर निकले और रास्ते में लोगों को उपदेश देने लगे। वर्ष 1521 तक उन्होंने तीन यात्रा चक्र पूरे किये, जिनमें भारत के विभिन्न हिस्सों के साथ अफगानिस्तान, फारस और अरब के प्रमुख स्थान शामिल हैं। इन यात्राओं को पंजाबी में ‘उदासियां’ के नाम से जाना जाता है। गुरुनानक जी के विचार सामाजिक परिवर्तन के वाहक बने। उन्होंने विचार दिया- ‘जगत का कर्ता सब जगह और सभी प्राणियों में मौजूद है।’

उन्होंने जीवन के आखिरी 17 साल, पांच माह और नौ दिन करतारपुर में बिताए। देह त्यागने से पूर्व उन्होंने अपने शिष्य भाई लहना को उत्तराधिकारी बनाया, जो आगे चलकर गुरु अंगद देव के रूप में जाने गए।

अन्य अहम घटनाएंः

1903ः अमेरिकी नागरिक इटालो मार्चिओनी को आइसक्रीम कोन के लिए पेटेंट मिला।

1949ः सोवियत संघ ने परमाणु बम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।

1955ः ब्रिटेन में टेलीविजन का व्यावसायीकरण शुरू।

1965ः संयुक्त राष्ट्र की पहल पर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम।

1977ः विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी पेले के नेतृत्व में अमेरिकी फुटबॉल टीम दो प्रदर्शनी मैच खेलने कलकत्ता पहुंची।

2011ः भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी का निधन।


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