चित्रकूट के पर्यटन विकास में पांच दशकों से दस्युओं का लगा है ग्रहण

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 यूपी/एमपी का मोस्ट वांटेंड है चित्रकूट का दुर्दांत डकैत गौरी यादव



चित्रकूट,18 सितम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच बसा बुंदेलखंड का चित्रकूट जनपद पिछले पांच दशकों से दुर्दांत डकैतों के आंतक का गढ़ रहा है। पांच लाख के कुख्यात इनामी बदमाश गौरी यादव गैंग का अब तक खात्मा न होने से सूबे की योगी सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद धर्म नगरी के सुप्रसिद्ध तीर्थ एवं पर्यटन स्थलों का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। अभी भी देश भर से प्रतिवर्ष आने वाले लाखों पर्यटक दुर्दांत डकैतों की दहशत के चलते पाठा के बीहड़ में स्थित शबरी प्रपात, राघव प्रपात एवं धारकुंडी आश्रम आदि प्रमुख दर्शनीय स्थलों तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

विंध्य पर्वत श्रृंखला के बीच बसा बुंदेलखंड धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक पर्यटन के लिहाज से देश में अपना अलग स्थान रखता है। भगवान श्रीराम ने वनवास काल के साढे ग्यारह वर्ष चित्रकूट की इसी पावन तपोभूमि में व्यतीत किया था। इसके चलते बुंदेलखंड का चित्रकूट विश्व के करोडों हिन्दुओं की आस्था का केंद्र बन कर विख्यात हुआ। केंद्र और प्रदेश की सरकारें लगातार बुनियादी ढांचा मजबूत कर भगवान श्रीराम की तपोभूमि के पर्यटन विकास को संकल्पित रहीं। लेकिन यहां दशकों से चली आ रही दस्यु समस्या विकास में रोडा बनी रही।

मारे गये कई दुर्दांत डकैत

चित्रकूट जिले का पाठा क्षेत्र करीब पांच दशकों तक आतंक का पर्याय रहे दुर्दांत डकैत शिवकुमार पटेल उर्फ दुदुआ, डा. अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया, स्वदेश पटेल उर्फ बलखड़िया, सुंदर पटेल उर्फ रागिया एवं बबली कोल आदि बदमाशों के आतंक का शिकार रहा। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पुलिस एवं एसटीएफ के अथक प्रयासों से यह तमाम दुर्दांत डकैत तो मारे गये, लेकिन आज तक बुंदेलखंड का चित्रकूट पूरी तरह से दस्यु समस्या से मुक्त नहीं हो सका।

डकैतों के खौफ से प्राकृतिक स्थल तक नहीं पहुंच रहे पर्यटक

बीहडों के जानकार आलोक द्विवेदी बताते है कि पाठा क्षेत्र विगत पांच दशकों से दस्यु गैंगों के खौफ का शिकार है। डकैतों की चहलकदमी के कारण आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी पाठा क्षेत्र के दर्जनों गांवों का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। धार्मिक,पौराणिक और पर्यटन की दृष्टि से तमाम महत्वपूर्ण स्थल होने के बावजूद दुर्दांत डकैतों की दहशत के चलते पर्यटक एवं स्थानीय लोग कई मनोरम स्थलों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उनका कहना है कि चित्रकूट में डकैतों की तुलना रक्तबीज नाम के उस राक्षस की तरह की जाती है जो अपनी रक्त के बून्द से पुनः जीवित हो जाता था। ठीक उसी तरह ये दस्यु गैंग भी हैं, जो एक गैंग के खात्मे के बाद बीहड़ में दूसरे गैंग के रूप में दस्तक दे देते हैं। बीहड़ में रहने वाले गैंग उन जंगलों को अपना सबसे मुफीद ठिकाना बनाते हैं जहां खाकी का भी पहुंचना खासा मुश्किल होता है। यूपी-एमपी का सीमावर्ती इलाका होने का भी इन बदमाशों को खासा फायदा मिलता रहा है।

प्राकृतिक स्रोत से प्यास बुझाते हैं डकैत

डकैतों से लोहा लेने वाले करवरिया परिवार के मुन्ना करवरिया बताते हैं कि चित्रकूट के बीहड़ में स्थित झलमल, बेधक, हनुमान चैक, बरदहाई नदी, टिकरिया, डोडामाफी के जंगल वो स्थान हैं ,जहां पानी की किल्लत कभी नहीं होती। पहाड़ों और घाटियों से निकलते जल श्रोत गैंग की प्यास बुझाने के लिए काफी होते हैं। गैंग पानी की तलाश में इन इलाकों में आता-जाता रहता है। लेकिन सटीक मुखबिर तंत्र की बदौलत दस्यु गैंग खाकी के पहुंचने से पहले ही बीहड़ में विलीन हो जाता है। दस्यु ददुआ, ठोकिया, रागिया, बलखडिया और बबली कोल आदि के खात्मे के बाद इलाके में दहशत का साम्राज्य खत्म होने एवं क्षेत्र में विकास की किरण फूटने की आस जगी थी। लेकिन इस उम्मीद पर कुछ ही दिनों में पांच लाख के इनामी गौरी यादव गैंग ने पानी फेर दिया।

दस्यु विहीन के लिए सरकार संकल्पित

उत्तर प्रदेश सरकार के लोक निर्माण राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय का कहना है कि पिछले पांच दशकों से दस्यु समस्या चित्रकूट के पर्यटन विकास में बाधक रहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के विकास के लिए सतत प्रयासरत हैं। करोडों की परियोजनाएं क्षेत्र के पर्यटन विकास के लिए संचालित है। चित्रकूट को दस्यु विहीन करने के लिए सरकार संकल्पित है।

गौरी यादव का जल्द होगा खात्मा

चित्रकूट के नवागंतुक पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल का कहना है कि यूपी-एमपी के मोस्ट वांटेड पांच लाख के इनामी दस्यु गौरी यादव गैंग के सफाये के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है। जल्द से जल्द गैंग का खात्मा कर भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट को पूरी तरह से दस्यु मुक्त बनाया जायेगा।


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